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खुशबू हत्याकांड में फैसला, ममेरे भाई को साक्ष्य छुपाने का दोषी करार

Updated at : 17 Dec 2025 10:01 PM (IST)
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खुशबू हत्याकांड में फैसला, ममेरे भाई को साक्ष्य छुपाने का दोषी करार

चर्चित नाबालिग खुशबू हत्याकांड मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है. जमुई के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-6 डॉ अतुल कुमार सिन्हा की अदालत ने सोनो थाना क्षेत्र के इस सनसनीखेज मामले में खुशबू के ममेरे भाई गोपाल तमोली को साक्ष्य नष्ट व छुपाने के आरोप में दोषी करार दिया है.

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जमुई. चर्चित नाबालिग खुशबू हत्याकांड मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है. जमुई के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-6 डॉ अतुल कुमार सिन्हा की अदालत ने सोनो थाना क्षेत्र के इस सनसनीखेज मामले में खुशबू के ममेरे भाई गोपाल तमोली को साक्ष्य नष्ट व छुपाने के आरोप में दोषी करार दिया है. न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत उसे दोषी पाते हुए सजा की तिथि निर्धारित कर दी है. यह मामला सोनो थाना कांड 102/18 से जुड़ा है, जो अभियुक्त गोपाल तमोली की पत्नी कुंती देवी के बयान पर दर्ज किया गया था. प्राथमिकी में कहा गया था कि गोपाल तमोली के मामा और मामी की मृत्यु के बाद उनकी 16 वर्षीया बेटी खुशबू को पढ़ाई के लिए सोनो स्थित अपने घर में रखा गया था. खुशबू कई बार घर से चली जाती थी, लेकिन लौट आती थी. 9 अप्रैल 2018 को वह घर से निकली और फिर वापस नहीं लौटी. मामले की जांच के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि खुशबू की किसी युवक से बातचीत को लेकर नाराज होकर उसकी हत्या कर दी गयी है और शव को छुपा दिया गया है. पुलिस की सख्ती के बाद गोपाल तमोली टूट गया और उसने स्वीकारोक्ति बयान में बताया कि खुशबू की हत्या के बाद अपने ही घर की पानी की टंकी में शव छिपाकर उस पर नमक डाल दिया गया. उसके बयान के आधार पर पुलिस ने टंकी से शव बरामद किया. पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को नामजद करते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था, जिनमें से पांच अभियुक्तों के खिलाफ ट्रायल चला. हालांकि, गवाहों के मुकर जाने और ठोस साक्ष्य के अभाव में अन्य अभियुक्तों को न्यायालय से राहत मिल गयी, लेकिन गोपाल तमोली को अपनी ममेरी बहन खुशबू की लाश छुपाने के अपराध में दोषी पाया गया. अब न्यायालय द्वारा अगली तिथि पर दोषी को मिलने वाली सजा का ऐलान किया जायेगा. इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय की उम्मीद बंधी है, वहीं यह मामला एक बार फिर रिश्तों के भीतर हुए जघन्य अपराध की याद दिलाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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