नक्सल छाया से निकलकर पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा बरहट,
Published by : MANISH KUMAR Updated At : 13 Jun 2026 4:25 PM
ड्रोन कैमरे से लिया गया बरहट वन क्षेत्र का विहंगम दृश्य, जो इसकी हरियाली, प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन संपदा को बयां करता है. बरहट के घने जंगलों में पहली बार नजर आया तेंदुआ, वन्यजीव प्रेमियों के लिए सुखद संकेत.
जमुई के बरहट शशिलाल की रिपोर्ट,
कभी नक्सल गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहने वाला बरहट आज अपनी नई पहचान गढ़ रहा है. घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां, कल-कल बहते जलस्रोत, दुर्लभ वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह इलाका अब बिहार के उभरते पर्यटन केंद्र व गैलेरी हब के रूप में देखा जाने लगा है.भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट में जमुई को बिहार के प्रमुख वन क्षेत्रों में तीसरा स्थान मिलने के बाद मुंगेर वन डिवीजन अंतर्गत बरहट का विशाल वन क्षेत्र एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है.स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस पहल की तो आने वाले वर्षों में बरहट बिहार के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग पहचान स्थापित कर सकता है.जिस क्षेत्र को कभी भय और बंदूक की पहचान से देखा जाता था, आज वही इलाका प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की क्षमता रखता है.प्राकृतिक संपदा का खजाना, लेकिन विकास की राह अब भी अधूरी.बरहट का वन क्षेत्र सैकड़ों किलोमीटर तक फैला हुआ है. यहां की हरी-भरी वादियां, ऊंची पहाड़ियां, प्राकृतिक झरने, जलधाराएं और कुकुरझप डैम जैसे स्थल किसी भी पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं. सुबह की धुंध से ढकी पहाड़ियां और जंगलों की शांति लोगों को प्रकृति के बेहद करीब होने का एहसास कराती हैं. किंतु विडंबना यह है कि इतनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद बरहट आज भी पर्यटन विकास की मुख्यधारा से दूर है. न तो यहां पर्यटकों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है.परिणामस्वरूप यह क्षेत्र अपनी वास्तविक क्षमता के अनुरूप पहचान हासिल नहीं कर पाया है.स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकार इस क्षेत्र को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करे तो यह बिहार के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों की तरह देशभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है.जंगलों में लौट रही जिंदगी, वन्यजीवों की मौजूदगी बढ़ा रही उम्मीद.बरहट के जंगलों में वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी पर्यावरण संरक्षण के सकारात्मक संकेत दे रही है. वन विभाग के अनुसार यहां हिरण, भालू, बंदर, सियार और तेंदुआ जैसे वन्यजीव देखे जा रहे हैं. हाल के दिनों में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा है.बरहट थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने कहा की किसी भी वन क्षेत्र में बड़े वन्यजीवों का निवास उस जंगल की बेहतर पारिस्थितिकी और जैव विविधता का प्रमाण होता है. यह दर्शाता है कि जंगल अपने प्राकृतिक स्वरूप को पुनः प्राप्त कर रहा है. ऐसे में बरहट को इको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं.नक्सलवाद की छाया हटने के बाद खुल रहे विकास के नए रास्ते.एक समय था जब बरहट का नाम आते ही लोगों के मन में नक्सल प्रभावित क्षेत्र की छवि उभरती थी. लेकिन बदलते समय के साथ हालात बदले हैं. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, विकास योजनाएं गांवों तक पहुंची हैं और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है.अब ग्रामीण चाहते हैं कि जिस तरह क्षेत्र में शांति और विकास का माहौल बना है, उसी तरह पर्यटन विकास को भी प्राथमिकता दी जाए. उनका मानना है कि पर्यटन ही वह माध्यम है जो बरहट की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकता है.पर्यटन उद्योग से हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार.समाजसेवी श्रीकांत उर्फ़ बिट्टू यादव, मुखिया कपिलदेव प्रसाद, पूर्व मुखिया अशोक रावत, ग्रामीण महेंद्र सिंह, अरुण सिंह और अमरदीप कुमार सहित कई ग्रामीणों ने सरकार से बरहट को विशेष पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मांग की है.इन लोगों ने कहा यदि बरहट में पर्यटन हब व्यवस्थित रूप से विकसित किया गया तो इसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं को मिलेगा. होटल, लॉज, रेस्टोरेंट, गाइड सेवा, वाहन संचालन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और साहसिक पर्यटन जैसी गतिविधियों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.आज बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं. पर्यटन उद्योग के विकसित होने पर उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं. इससे पलायन में कमी आएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी. सरकार और प्रशासन समय रहते दूरदर्शी पहल की, तो बरहट न केवल जमुई बल्कि पूरे बिहार के लिए पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार का एक सफल मॉडल बन सकता है.
क्या कहते है वन अधिकारी
इस संबंध में बरहट-मलयपुर वन क्षेत्र के रेंजर सुशांत कुमार सिंह ने बताया कि बरहट का वन क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से समृद्ध है. घने जंगलों से आच्छादित यह विस्तृत वन क्षेत्र अनेक वन्य जीवों का सुरक्षित आश्रय स्थल है. उन्होंने कहा कि यहां की मनोरम वादियां, हरियाली और वन्य जीवन पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखते हैं. भविष्य में इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिल सकेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










