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चैंबर की राशि गबन करने का आरोप बेबुनियाद है : पूर्व सचिव

Updated at : 29 Nov 2025 6:16 PM (IST)
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चैंबर की राशि गबन करने का आरोप बेबुनियाद है : पूर्व सचिव

पूर्व सचिव द्वारा जारी प्रेस-विज्ञप्ति में बताया गया कि वर्तमान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सुनील बरनवाल और सचिव नीतेश केशरी द्वारा लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद है.

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जमुई. जमुई चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व सचिव और कोषाध्यक्ष पर वर्तमान सचिव और अध्यक्ष द्वारा एक लाख 80 हजार रुपए के गबन का लगाये गये आरोप का खंडन शनिवार को पूर्व सचिव शंकर साह द्वारा प्रेस-विज्ञप्ति जारी कर किया गया है. पूर्व सचिव द्वारा जारी प्रेस-विज्ञप्ति में बताया गया कि वर्तमान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सुनील बरनवाल और सचिव नीतेश केशरी द्वारा लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद है. उन लोगों द्वारा मेरा और कोषाध्यक्ष चंद्रकांत भगत की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है. उन्होंने बताया कि जब चेंबर ऑफ कॉमर्स का कार्यकाल पूरा हो गया तो मैं और चंद्रकांत भगत ने अपना इस्तीफा चेंबर के स्थायी संरक्षक सदस्य सह मार्गदर्शक मंडल को सौंप दिया था और अध्यक्ष पद के लिए का चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. उस समय इन लोगों ने मुझ पर चुनाव न लड़ने का दबाव बनाया. जब मैंने ऐसा करने से इनकार किया तो यह लोग मेरे बारे में अनर्गल बातें फैलाने लगे. चैंबर के स्थायी संरक्षक सदस्य जब चुनाव कराने के लिए तैयार हो ही रहे थे कि इन लोगों ने षड्यंत्र कर चोरी छुपे चैंबर का रसीद छाप कर अपने मन मुताबिक व्यवसायियों से 250 रुपये लेकर सदस्य बनना शुरू कर दिया. जब व्यवसायियों ने इसकी जानकारी स्थायी संरक्षक सदस्य सह मार्गदर्शक को दी तब इस षड्यंत्र का खुलासा हुआ. स्थायी संरक्षक सदस्य सह मार्गदर्शक मंडल ने पत्राचार कर कई बार इन लोगों को बुलाया, लेकिन यह लोग नहीं आए तब स्थायी संरक्षक सदस्यों ने जिस संगठन को 1988 में जमुई व्यावसायिक संघ की स्थापना की थी उसे पुनर्जीवित करने का काम किया और जमुई व्यावसायिक संघ के नाम से सदस्यता अभियान की शुरुआत की. इस बीच इन लोगों ने आनन-फानन में चुनाव की घोषणा की. जिसमें अध्यक्ष व सचिव का नाम पहले से ही घोषित था बस दिखावे के लिए चुनाव का रूप दिया गया. पूर्व सचिव श्री साह ने बताया कि संगठन का खाता जो 1988 में जमुई व्यावसायिक संघ के नाम से यूको बैंक जमुई में खुला था और 2010 में जब चेंबर ऑफ कॉमर्स के नाम से संगठन हुआ तो इस खाते को चेंबर ऑफ कॉमर्स जमुई के नाम से जाना जाने लगा. इसलिए यह कहना कि यह चैंबर कॉमर्स का ही पैसा है तो यह गलत है यह पैसा पुनः सभी व्यवसायियों के हित में जमुई व्यावसायिक संघ के खाते में सुरक्षित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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