थानों में नहीं हैं रीडर-टाइपिस्ट, कंप्यूटर भी हैं खराब
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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कई थानों को मिल चुके हैं कंप्यूटर, लेकिन ऑपरेटर की कमी के करण बाधित है काम अधिकांश थानेदार कांडों के सुपरविजन के िलए नहीं निकाल पर रहे समय कर्मियों की कमी के कारण थानों पर बढ़ गया है काम का बोझ जमुई : जिले में अपराध पर अंकुश लग सके इसके लिए थानों को अपग्रेड […]
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कई थानों को मिल चुके हैं कंप्यूटर, लेकिन ऑपरेटर की कमी के करण बाधित है काम
अधिकांश थानेदार कांडों के सुपरविजन के िलए नहीं निकाल पर रहे समय
कर्मियों की कमी के कारण थानों पर बढ़ गया है काम का बोझ
जमुई : जिले में अपराध पर अंकुश लग सके इसके लिए थानों को अपग्रेड कर दिया गया. साथ ही थाने में थानेदार के रूप में सब इंस्पेक्टर की जगह इंस्पेक्टर की प्रतिनियुक्ति की गयी. पोस्टिंग होने लगी तो थानेदारों को इंस्पेक्टर के रूप में साधारण केस की सुपरविजन की जिम्मेदारी भी मिलने लगी. लेकिन मैन पावर की कमी ऐसी हो गयी कि जिले के कई थानों में सुपरविजन के सैकड़ों केस लंबित हो गये.
जानकारी के अनुसार जिले में कई थाने ऐसे भी हैं जहां ना तो सुपरविजन रिपोर्ट लिखने के लिए टाइपिस्ट है व ना ही रीडर. कई थाना में तो कंप्यूटर की आपूर्ति की गयी लेकिन उससे कार्य नहीं किया जा सका है.
यह थाना बदहाल स्थिति में रखा हुआ है. स्थिति यह हो गयी है कि अधिकांश थानेदार रोजाना की विधि-व्यवस्था व अत्यधिक काम होने के कारण सुपरविजन रिपोर्ट बनाने के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं. व यदि वह केस का सुपरविजन कर भी ले रहे हैं तो रीडर नहीं होने के कारण सुपरविजन रिपोर्ट टाइप नहीं करवा पा रहे हैं. जिस कारण सुपरविजन रिपोर्ट लंबित होता जा रहा है.
सदर थाना की बात करें तो यहां वर्तमान समय में कुल 15 अवर निरीक्षक, सात सहायक निरीक्षक व जिला पुलिस बल, बीएमपी, सैप जवान व मोबाईल टाईगर समेत कुल 30 पुलिस के जवान हैं. पुलिस पदाधिकारियों की मानें तो सदर थाना में प्रत्येक माह 35 से 40 मामला दर्ज होता है. जो अलग-अलग क्षेत्र से जुड़ा रहता है. अक्तूबर माह में सदर थाना में कुल 36 मामला दर्ज हुआ है जिसमें से 13 मामलों का सुपर विजन रिपोर्ट अभी तक लंबित है. थाना में एक कम्प्यूटर ऑपरेटर कार्यरत है जो रीडर का भी कार्य करता है. जिले के इंस्पेक्टर थानों की बात होती है तो खैरा थाना का नाम भी आता है. जिला मुख्यालय से महज आठ से दस किलोमीटर दूर स्थित यह थाना नक्सल प्रभावित भी है व यहां प्रतिमाह औसतन 30 से 40 केस दर्ज होते हैं. परंतु टाइपिस्ट व रीडर नहीं होने के कारण यहां भी मामला पेंडिंग है. खैरा थाने में वर्ष 2017 के अक्तूबर माह तक 70 से 80 मामले सुपर विजन तथा 200 से अधिक एसआर केसे सुपरविजन के लिए लंबित हैं. इसके अलावा 350 से लेकर 400 तक मामले अनुसंधान हेतु लंबित हैं.
कंप्यूटर भी हुआ खराब
खैरा थाने में एसआर व नॉन एसआर केस की रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कंप्यूटर मुहैया जरुर कराया गया था. परंतु टाइपिस्ट नहीं होने के कारण उसका रखरखाव नहीं हो सका. जिस कारण वह कंप्यूटर भी खराब हो गया है. गिद्धौर थाने में बीते महीने अक्तूबर माह में दर्ज मामले की बात करें तो कुल 11 मामले अक्तूबर माह में दर्ज हुए हैं. इसके अलावे सोनो थाना में 22 मामला, सिकंदरा थाना में 27 मामला, झाझा थाना में 37 मामला, लक्ष्मीपुर थाना में 27 मामला अब तक अक्तूबर माह में दर्ज किया गया है. झाझा, सोनो, लक्ष्मीपुर तथा सिमुलतला में रीडर व टाइपिस्ट नहीं होने के कारण सुपर विजन की रिपोर्ट तैयार नहीं किया जा सका है.
टाइपिस्ट व रीडर के अभाव में थानों पर बढ़ता ही जा रहा है कामों का बोझ
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