बस पकड़ने के लिए धूप में खड़े रहते हैं यात्री

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परेशानी. कई वाहन पड़ाव पर नहीं हैं शेड शहर में बस पड़ाव को लेकर समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जमुई : शहर में चार स्थानों से लोग वाहन पर बैठकर यात्रा करते हैं. झाझा बस स्टैंड पर यात्री शेड को छोड़ जमुई के शेष चार […]

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परेशानी. कई वाहन पड़ाव पर नहीं हैं शेड

शहर में बस पड़ाव को लेकर समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
जमुई : शहर में चार स्थानों से लोग वाहन पर बैठकर यात्रा करते हैं. झाझा बस स्टैंड पर यात्री शेड को छोड़ जमुई के शेष चार स्टैंड पर यात्रियों को बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है. अर्थात यात्री को धूप में खड़ा हो कर ही अपने वाहन का इंतजार करना पड़ता है. बरसात महीने में यात्री किसी दुकान के आगे खड़ा हो कर गाड़ी की प्रतीक्षा करते हैं. इसके अतिरिक्त किसी भी स्टैंड पर यात्रियों के लिए पेयजल या शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है. खासकर महिला यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
झाझा स्टैंड से थोड़ी दूर नगर परिषद का शौचालय तो है, परंतु वहां की स्थिति इतनी खराब है कि शौच जाना मुश्किल है. महिसौड़ी चौक में शौचालय है लेकिन उसमें ताला लगा हुआ है. बोधवन तालाब स्थित स्टैंड से सटा शौचालय बेकार पड़ा है. यात्रियों का बोतल बंद पानी के भरोसे ही प्यास बुझती है. झाझा स्टैंड पर जहां जलजमाव के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं महिसौड़ी और बोधवन तालाब का बस स्टैंड पर गंदगी पसरा है. इन सभी स्टैंडों पर यात्रियों की आवाजाही अच्छी-खासी रहती है.
हमेशा लगा रहता है जाम
बोधवन तालाब स्थित सड़क पर ही जिला परिषद का स्टैंड चलता है. सुबह छह बजे से रात के नौ बजे तक कभी भी ऐसा मौका नहीं होता है जब उस जगह जाम नहीं लगा हो. हर दिन हो-हल्ला, हंगामा वहां की नियति बन गयी है. सबसे बाड़ी बात यह है कि जाम लगने के दौरान वहां पर पुलिस बल कभी रहते नहीं, न ही ट्रैफिक का कोई सिस्टम है. स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राएं काफी परेशान रहती हैं. उनकी साइकिल और स्कूटी उसी जाम में फंसती है. आसपास के लोग फब्तियां भी कसते हैं. कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं है जिस होकर लोग आवाजाही कर सकें. लगातार सुर्खियों में आने के बावजूद प्रशासन इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन है.
जमुई के महिसौड़ी स्टैंड को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं. स्टैंड होने के बावजूद महिसौड़ी स्टैंड से वाहन चालक सड़क पर ही यात्रियों को बैठाते हैं. सड़कों पर वाहन खड़ा करने के कारण हमेशा जाम लग जाता है. सबसे खराब स्थिति स्कूल जाने और लौटने के दौरान रिक्शा और ऑटो पर सवार बच्चे उसी जाम में फंस जाते हैं. कड़ी धूप के बीच जाम के कारण बच्चे काफी परेशान होते हैं. पुलिस-प्रशासन भी इस मामले में उदासीन है.
ऑटो चालक करते हैं मनमानी
जमुई में वैसे तो टेंपो स्टैंड है जहां से यात्री स्टेशन के लिए जाते हैं. लेकिन टेंपो चालक की मनमानी शहर में इस कदर है कि जहां चाहा वहां वाहन खड़ा कर यात्रियों को बिठाते हैं. हद तो तब हो जाती है जब पुलिसवाले के सामने यह नजारा देखने को मिलता है. कचहरी चौक पर कभी भी ऐसा नहीं दिखता कि चौक ऑटो वाहन से खाली है. बैंक की भीड़, गाड़ियों की आवाजाही के बीच टेंपो चालक आम लोगों के लिए परेशानी पैदा करते हैं.
जलजमाव से यात्री हैं परेशान
झाझा बस स्टैंड में नगर परिषद ने लाखों रुपये खर्च कर पीसीसी कार्य कराया ताकि यात्रियों को सुविधा हो. लेकिन लोगों की समस्या यथावत है.जल निकासी की व्यवस्था सही नहीं रहने के कारण वर्षा होने पर इस कारण स्टैंड पर तालाब सा नजारा दिखता है.अगर वाहन इसी पानी में खड़ी करने की मजबूरी हो तो यात्री जूता-चप्पल खोलकर ही वाहन पर सवार हो सकते हैं. स्टैंड कर्मी मुकेश सिंह बताते हैं कि छह माह पूर्व नगर परिषद द्वारा स्टैंड में पीसीसी ढलाई कराई गयी थी जिसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है.
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