कौन हैं IPS सुनील नायक? जिन्हें गिरफ्तार करने पहुंचे थी आंधप्रदेश पुलिस, पटना सिविल कोर्ट से मिली राहत

IPS Sunil Nayak
IPS Sunil Nayak: बिहार में फायर ब्रिगेड के IG पद पर तैनात इस IPS अधिकारी को गिरफ्तार करने आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम पटना पहुंची, कौन हैं 2005 बैच के यह IPS अधिकारी और क्यों उनके पीछे पड़ी है दूसरे राज्य की पुलिस.
IPS Sunil Nayak: बिहार कैडर के कद्दावर IPS अधिकारी और वर्तमान में फायर ब्रिगेड के IG एम. सुनील नायक के सरकारी आवास पर आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी.
आरोप बेहद गंभीर हैं, एक पूर्व सांसद की हत्या का प्रयास. जहां एक तरफ पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर ले जाने की तैयारी में थी, वहीं दूसरी तरफ IPS अधिकारी ने तुरंत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
कौन हैं IPS सुनील नायक
2005 बैच के IPS एम. सुनील नायक बिहार पुलिस के जाने-माने नाम हैं. वे अपनी कड़क कार्यशैली और अनुशासन के लिए विभाग में पहचाने जाते हैं. वे मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से संबंध रखते हैं, लेकिन बिहार कैडर में अलॉटेड हैं. उन्होंने IPS में प्रवेश 12 दिसंबर 2005 को किया था और उनकी करियर की शुरुआत बिहार में विभिन्न पदों पर हुई.
बिहार में सुनील कुमार नायक ने एसपी स्तर पर कई जिलों में काम किया. 2019 में व्यक्तिगत कठिनाइयों के आधार पर उन्हें आंध्र प्रदेश कैडर में इंटर-कैडर डेपुटेशन पर भेजा गया था. यह डेपुटेशन तीन साल के लिए था जो 7 जनवरी 2020 से शुरू हुआ था. इसके बाद वह आंध्र प्रदेश में वे CID के DIG के पद पर तैनात रहे और विभिन्न जांचों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
पटना सिविल कोर्ट से मिली राहत
आंध्र प्रदेश में डेप्युटेशन के दौरान वे काफी ताकतवर भूमिका में थे, लेकिन सांसद के साथ हुए विवाद ने उनके करियर पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है. पटना में उनकी गिरफ्तारी के लिए पहुंची आंध्र पुलिस टीम.
IPS एम. सुनील नायक को पटना सिविल कोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की पुलिस ट्रांजिट रिमांड की डिमांड को रिफ्यूज कर दिया है. आंध्र पुलिस के पास थी ना गिरफ्तारी का वारंट था, न अपडेट केस डायरी. जिसके चलते कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और सीधे रिमांड को रिफ्यूज कर दिया.आंध्र प्रदेश पुलिस अफसर बिना वर्दी कोर्ट पहुंचे थे, उन्हें कोर्ट ने बैठा लिया गया है.
2021 का विवाद बना गिरफ्तारी की वजह
पूरा विवाद मई 2021 का है, जब सुनील नायक आंध्र प्रदेश CID में प्रतिनियुक्ति पर थे. उसी दौरान नरसापुरम के पूर्व सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की कोशिश हुई. इसी आधार पर आईपीसी की धारा 307 के तहत केस दर्ज हुआ.
पूर्व सांसद का दावा है कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी की आलोचना की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई. बाद में उन्होंने 2023 में इस मामले में मुख्यमंत्री सहित कई अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसमें सुनील नायक भी आरोपी बनाए गए है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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