hajipur news. फार्मास्युटिकल शिक्षा व ट्रांसलेशन रिसर्च को सशक्त बनाने की जरूरत : प्रो एम कृष्णन

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नाइपर के स्थापना दिवस पर बायोलॉजिकल थेरेप्यूटिक्स पर संगोष्ठी आयोजित

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हाजीपुर. शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) के स्थापना दिवस पर शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस अवसर पर बायोलॉजिकल थेरेप्यूटिक्स पर संगोष्ठी हुई, जिसमें वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया. कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई. इसके बाद संस्थान के सहायक प्रोफेसर एवं प्रभारी रजिस्ट्रार ने अतिथियों का स्वागत किया. अध्यक्षीय संबोधन में नाइपर की निदेशक प्रो के रुक्मिणी ने रुक्मणी ने संस्थान की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला. मौके पर जेएनसीएएसआर, बेंगलुरु के प्रोफेसर एवं सीएसआइआर-सीडीआरआइ, लखनऊ के पूर्व निदेशक डॉ तापस कुंडू ने मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, जीवविज्ञान में उभरती शोध प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला. साथ ही हाल के वर्षों में नाइपर की उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त करते हुए मजबूत होती शोध संस्कृति और वैज्ञानिक योगदानों की प्रशंसा की. मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु के कुलपति प्रो एम कृष्णन ने भारत में फार्मास्यूटिकल शिक्षा और ट्रांसलेशनल रिसर्च को सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से स्वदेशी शोध क्षमता को बढ़ावा देने और नवाचार आधारित समाधान विकसित करने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की. विकास अनुसंधान प्रभाग, आइसीएमआर, दिल्ली के प्रमुख डॉ तरुण मदन ने भी मिशन उन्मुख, सहयोगात्मक शोध की आवश्यकता बतायी.

कार्यक्रम में 20 शोधार्थियों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया. अंतरराष्ट्रीय यात्रा अनुदान प्राप्त करने वाले सात शोधार्थियों को पांच हजार रुपये की नकद राशि दी गयी. पेटेंट प्राप्त करने वाले तीन शोधार्थियों तथा श्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार जीतने वाले नौ शोधार्थियों को प्रेरणादायी पुस्तकें भेंट की गयीं. साथ ही एक शोधार्थी को स्टार्टअप गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रयास के लिए विशेष प्रशंसा पत्र दिया गया. नाइपर के एसोसिएट प्रोफेसर एवं डीन डॉ पी रामालिंगम ने धन्यवाद ज्ञापित किया. संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किये, जिनमें बायोलॉजिकल थेरेप्यूटिक्स, उद्योग दृष्टिकोण और बायोफार्मास्यूटिकल नवाचारों पर चर्चा की गयी. छात्रों के सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समारोह का समापन हुआ.

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Shashi Kant Kumar

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