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गौरवशाली है किरण मंडल की साहित्यिक विरासत

Updated at : 18 May 2024 2:36 PM (IST)
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गौरवशाली है किरण मंडल की साहित्यिक विरासत

साहित्यिक संस्था किरण मंडल का 77वां स्थापना दिवस मनाया गया. शहर के बागमली स्थित बेटी विद्यायन के राष्ट्रकवि दिनकर सभागार में किरण मंडल पुराना तथा बज्जिका मंदाकिनी के संयुक्त तत्वावधान में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया.

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हाजीपुर. साहित्यिक संस्था किरण मंडल का 77वां स्थापना दिवस मनाया गया. शहर के बागमली स्थित बेटी विद्यायन के राष्ट्रकवि दिनकर सभागार में किरण मंडल पुराना तथा बज्जिका मंदाकिनी के संयुक्त तत्वावधान में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष डॉ दामोदर प्रसाद सिंह ने की. संचालन मणिभूषण प्रसाद सिंह अकेला और आशुतोष सिंह ने किया. विवेका चौधरी ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की. संस्था के महासचिव डॉ महेंद्र प्रियदर्शी ने अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ विद्या चौधरी ने कहा कि बिहार की प्रतिष्ठित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था किरण मंडल का गौरवशाली इतिहास है. किरण मंडल के मंचों पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री, गोपाल सिंह नेपाली, नीरज, रुद्र, नागार्जुन, रामदयाल पांडेय जैसे नामचीन कवि काव्यपाठ कर चुके हैं. विशिष्ट अतिथि डॉ बीके झा, राष्ट्रीय बज्जिका भाषा विकास परिषद के महासचिव अखौरी चंद्रशेखर आदि ने विचार रखते हुए किरण मंडल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला. मौके पर अतिथियों ने कवि अवधेश तृषित रचित बज्जिका काव्य संग्रह माटी के गमक का विमोचन किया. समीक्षक रामनरेश शर्मा ने कहा कि अवधेश तृषित के काव्य संग्रह से बज्जिका साहित्य की अभिवृद्धि हुई है.

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ. इसका आगाज रांची के कवि विनोद कुमार झा ने ऊंची-ऊंची उठने लगी दीवार घर में, खुलते नहीं है कोई किवाड़ घर में… सुनाकर किया. पटना से आयीं डॉ विद्या चौधरी ने अपनी कविता बेटी घर-घर की शान है.. सुनाकर श्रोताओं को प्रभावित किया. अखौरी चंद्रशेखर ने जब दिल से दिल मिल जाये तो अरमानों का मेला लगता है.. सुनाकर समा बांधा. डॉ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता, डॉ शिव बालक राय प्रभाकर ने प्रजातंत्र की धरती से शंखनाद कर विकसित राष्ट्र हेतु करें मतदान.., आशुतोष सिंह ने बरसो बरसो हे घन बरसो.., डॉ नंदेश्वर प्रसाद सिंह ने कवि शब्दों से काटते हैं लोहे की जंजीरें.., राजकिशोर सिंह रत्नेश ने महंगाई किसने बढ़ायी.., सुरेश प्रसाद चौरसिया ने वैभव टूटे इमारत टूटे.. कविता सुनायी. विजय कुमार सिंह ने चुनाव गीत प्रस्तुत कर तालियां बटोरी. अध्यक्षीय संबोधन में डॉ दामोदर प्रसाद सिंह ने कहा कि किरण मंडल में ज्यादा से ज्यादा नये रचनाकारों को जोड़ने की आवश्यकता है. कार्यक्रम में डॉ उमेश कुमार उषाकर, जगन्नाथ सिंह, साक्षी कुमारी, मुकेश सावर्ण, दीक्षाश्री, बबलू कुमार, हंसलाल साह, डॉ प्रियंका, प्रो मीनाली प्रियदर्शी, रविभूषण, रुपेश, नवल, डॉ केके सिन्हा, इंदु कौशल, वैशाली, शौर्य, रेखा, मुकेश कुमार शर्मा, अभिषेक समेत अन्य उपस्थित थे.

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