पटना में निर्माण कार्य से जीपीओ गोलंबर पर हर दिन जाम, 200 मीटर की दूरी तय करने में लगते हैं 30 से 45 मिनट

हार्डिंग पार्क से पटना जंक्शन के सामने तक ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया. इससे आर ब्लॉक से कंकड़बाग तो पहुंचना आसान हो गया, लेकिन हार्डिंग पार्क से पटना जंक्शन तक लगने वाले जाम की समस्या का निदान नहीं हो सका है.
पटना में इन दिनों जाम से सबसे अधिक परेशानी जीपीओ गोलंबर के पास हो रही है. दिन के पीक ऑवर में एक वाहन को यहां से गुजरने में आधा घंटा तक का समय लग जा रहा है. बुधवार को प्रभात खबर ने जीपीओ गोलंबर के जाम की पड़ताल की, तो पता चला कि हर दिन 500 से अधिक सार्वजनिक वाहन यहां से गुजरते हैं. इनमें अधिकतर ऑटो, बस और इ-रिक्शा का यहां ठहराव होता है. जीपीओ गोलंबर के नीचे तीन लेयर में अस्थायी दुकानों का अतिक्रमण है, जिसके कारण सड़क की चौड़ाई आधी से कम बच जाती है. इसके अलावा पास में हो रहे निर्माण कार्य के कारण स्टेशन की तरफ से रास्ता बंद कर दिया गया है और सभी वाहनों को यहीं से घूमना पड़ता है. कुल मिलाकर तीन तरफा मार के कारण जीपीओ गोलंबर पर इन दिनों हर रोज भारी जाम की समस्या हो रही है.
जीपीओ गोलंबर की चौड़ाई तो काफी ज्यादा है, लेकिन अस्थायी दुकानदारों, फेरीवालों, ऑटो, इ-रिक्शा चालकों की वजह से यहां सुबह नौ बजे से ही जाम लगना शुरू हो जाता है. हालांकि, गर्मी की वजह से दोपहर के समय जाम का असर कम रहता है, लेकिन शाम होते-होते जीपीओ गोलंबर पर बेतरतीब जाम लगना शुरू हो जाता है. ट्रैफिक पुलिस की तैनाती भी की जाती है और ट्रैफिक पुलिसकर्मी गाड़ियों पर लाठी पीटते भी नजर आते हैं, लेकिन गाड़ियों की लंबी कतार के कारण व्यवस्था दम तोड़ने लगती है. दरअसल, बुद्ध मार्ग से जीपीओ गोलंबर के बीच निर्माण का काम भी चल रहा है और निर्माण कार्य भी जाम लगने का अहम कारण है.
हार्डिंग पार्क से पटना जंक्शन के सामने तक ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया. इससे आर ब्लॉक से कंकड़बाग तो पहुंचना आसान हो गया, लेकिन हार्डिंग पार्क से पटना जंक्शन तक लगने वाले जाम की समस्या का निदान नहीं हो सका है. ऊपर से बढ़ती आबादी, रोजाना सड़कों पर नयी गाड़ियों के उतरने से जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. जीपीओ गोलंबर से पटना जंक्शन की दूरी 200 मीटर की है, लेकिन पीक आवर यानी सुबह और शाम में जीपीओ गोलंबर से पटना जंक्शन तक पहुंचने में 45 मिनट, तो कभी-कभी एक घंटे तक लग जाता है.
ऐसा नहीं है कि जीपीओ गोलंबर और पटना जंक्शन के करीब से गुजरने वाली सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाने की कवायद नहीं की गयी है, लेकिन यह अतिक्रमण विरोधी अभियान का अधिक असर जमीन पर दिखता नहीं है. जिला प्रशासन व नगर निगम की तरफ से अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाता है. हर साल विशेष टीम का गठन होता है. जेसीबी और बुलडोजर का भी इस्तेमाल होता है. लेकिन सुबह अतिक्रमण विरोधी अभियान चला कर अवैध दुकानदारों और विक्रेताओं को हटाया जाता है और शाम में ही दुकानें सजकर तैयार हो जाती हैं.
हालांकि पटना जंक्शन से जीपीओ गोलंबर के बीच बनी सड़क काफी चौड़ी है, लेकिन दोनों तरफ दर्जनों की संख्या में दुकानें बनायी गयी हैं. फूल, फल, मोबाइल एसेसरीज, बेल्ट, जूते-चप्पल, कपड़े की दुकानों को अवैध तरीके से जीपीओ गोलंबर इलाके में लगाया गया है. इन दुकानों से न तो जिला प्रशासन को कोई कमाई होती है और न ही ऐसी दुकानों का रिकॉर्ड जिला प्रशासन के पास होता है. लेकिन इन दुकानों की वजह से जाम लगता है. दूसरी ओर पटना की सड़कों पर इ-रिक्शा से लेकर कारों तक असीमित संख्या में सड़कों पर चलायी जा रही हैं. ट्रैफिक सेंस की कमी की वजह से जीपीओ गोलंबर पर जाम लगता है. एक अनुमान के मुताबिक, आर ब्लॉक से जीपीओ गोलंबर और जीपीओ गोलंबर से पटना जंक्शन के बीच रोजाना 6 हजार छोटी बड़ी गाड़ियों, इ-रिक्शा, कारों की आवाजाही होती है और इस वजह से भी लोगों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है.
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जीपीओ गोलंबर और आसपास के इलाकों में लगने वाले जाम के मसले पर गांधी मैदान थाना के ट्रैफिक थानाध्यक्ष अशोक कुमार के मुताबिक, निर्माण कार्य की वजह से जाम लग रहा है. रोजाना नयी गाड़ियों के सड़कों पर उतरने की वजह से भी जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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