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मेडिकल कॉलेज के तर्ज पर मॉडल सदर अस्पताल में डीएनबी कोर्स की पढ़ाई के लिए मिली मान्यता

Updated at : 03 Sep 2024 9:57 PM (IST)
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मेडिकल कॉलेज के तर्ज पर मॉडल सदर अस्पताल में डीएनबी कोर्स की पढ़ाई के लिए मिली मान्यता

अब मेडिकल कॉलेज के तर्ज पर मॉडल सदर अस्पताल में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स की पढ़ाई शुरू होगी. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर इसकी मान्यता मिली है. पहले चरण में यहां पीडियाट्रिक्स कोर्स में चिकित्सकों की पढ़ाई होगी, इसके लिए दो सीटें मिली है.

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गोपालगंज. अब मेडिकल कॉलेज के तर्ज पर मॉडल सदर अस्पताल में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स की पढ़ाई शुरू होगी. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर इसकी मान्यता मिली है. पहले चरण में यहां पीडियाट्रिक्स कोर्स में चिकित्सकों की पढ़ाई होगी, इसके लिए दो सीटें मिली है. इनमें एक बिहार के मेडिकल छात्र के लिए रिजर्व रहेगा, जबकि दूसरी सीट दूसरे राज्यों के मेडिकल छात्र के लिए रिजर्व रखा गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया कोर्स की पढ़ाई के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन डिपार्टमेंट में आवेदन अप्लाइ की गयी है. मेडिकल साइंस टीम की एसेसमेंट के बाद इन दोनों कोर्स की भी मान्यता मिल सकती है. गोपालगंज में मेडिकल की पढ़ाई शुरू होने से स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने खुशी जाहिर की है. मंगलवार को बिहार सरकार के प्रोग्राम सलाहकार प्रभाकर सिन्हा, को-ऑर्डिनेटर राहुल कुमार राहुल, नीलाभ राज ने सिविल सर्जन डॉ वीरेंद्र प्रसाद से मान्यता के दस्तावेजों से पर हस्ताक्षर करवाये. मौके पर पीडियाट्रिक्स कोर्स के इंचार्ज डॉ सौरभ अग्रवाल, डॉ संजय कुमार, डीपीएम धीरज कुमार, अनुराग जीतन आदि मौजूद रहे. मालूम हो कि मॉडल सदर अस्पताल गोपालगंज के अलावा बिहार मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (बिम्हास) में डीएनबी की चार सीटें मिली हैं. इसके अलावा मोतिहारी सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की छह सीटें, नालंदा, भोजपुर, बेगूसराय व रोहतास सदर अस्पताल में पीडियाट्रिक्स में दो-दो सीटें दी गयी हैं. लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की चार सीटें मिली हैं. इन सभी जगहों पर डीएनबी की पढ़ाई शुरू होने से मरीजों को लाभ मिलेगा. डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) में डिग्री तीन साल, जबकि डिप्लोमा दो साल का होता है. मान्यता मिलने से बिहार के अलावा दूसरे राज्यों के एमबीबीएस नीट पीजी क्वालिफाइ छात्र पढ़ने के लिए आयेंगे. सरकार की ओर से उन्हें काेर्स करने पर हर महीने अतिरिक्त भत्ता दिया जाता है. स्नातकोत्तर डिग्री सभी उद्देश्यों (मेडिकल शिक्षण पदों पर नियुक्ति सहित) में मास्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी), मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस), डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (डीएम) और मास्टर ऑफ सर्जरी (एमसीएच) के बराबर है. वहीं सिविल सर्जन डॉ वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि डीएनबी कोर्स शुरू होने से स्वास्थ्य विभाग को सुपर स्पेशियलिटी के डॉक्टर मिलेंगे. विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सदर अस्पतालों को फायदा मिलेगा. यहां अध्ययनरत चिकित्सक एमबीबीएस और नीट पीजी क्वालिफाइ होंगे, जो अपनी सेवा पढ़ाई के साथ-साथ सदर अस्पताल में देंगे. इससे मरीजों को सुविधा होगी. डीएनबी की पढ़ाई शुरू होने से पहले क्लास रूम, लाइब्रेरी, डिपार्टमेंटल मैनेजर, स्टाफ, चतुर्थवर्गीय कर्मी, सुरक्षा गार्ड आदि उपलब्ध कराये जायेंगे. मालूम हो कि सांसद सह जेडीयू के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ आलोक कुमार सुमन ने डीएनबी कोर्स के लिए पहल की थी. सांसद की पहल पर सिविल सर्जन डॉ बीरेंद्र प्रसाद ने जून-जुलाई 2023 में डीएनबी कोर्स की मान्यता के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन में आवेदन अप्लाइ करायी थी. मेडिकल साइंस टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर मान्यता मिली है. मॉडल सदर अस्पताल की नयी बिल्डिंग भी बन रही है, ऐसे में कई नये कोर्स की मंजूरी मिलने की संभावना जतायी जा रही है.

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