गोपालगंज में भू-माफियाओं ने बेच दी सरकारी जमीन, CO ने जमाबंदी भी दर्ज कर दी, ऐसे हुआ खुलासा

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 17 Oct 2024 6:34 PM

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Gopalganj: गोपालगंज जिले के भोरे अंचल कार्यालय में राजस्व कर्मचारी बिचौलियों से घिरे रहते हैं. इसका नतीजा है कि एक सरकारी जमीन का ही सौदा हो गया. सिर्फ सौदा ही नहीं हुआ बल्कि यहां तक कि उस सरकारी जमीन की जमाबंदी भी तत्कालीन सीओ ने दर्ज कर दी.

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Gopalganj: गोपालगंज जिले के भोरे अंचल कार्यालय में भू-माफियाओं का राज है. आरोप है कि यहां राजस्व कर्मचारी बिचौलियों से घिरे रहते हैं. इसका नतीजा है कि एक सरकारी जमीन का ही सौदा हो गया. सिर्फ सौदा ही नहीं हुआ बल्कि यहां तक कि उस सरकारी जमीन की जमाबंदी भी तत्कालीन सीओ ने दर्ज कर दी. अब मामला सामने आने के बाद वर्तमान सीओ के द्वारा जांच की बात कही जा रही है. यह पूरा मामला भोरे थाना क्षेत्र के इमिलिया गांव का है, जहां श्मशान की जमीन की खरीद-बिक्री कर दी गयी. इधर, गांव के लोग इसका विरोध कर रहे हैं और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

खतियान में है गैर मजरूआ मालिक

भोरे अंचल के इमिलिया मौजा में यह जमीन गैर मजरूआ मालिक, किस्म – परती कदीम करके दर्ज है. इस जमीन पर गांव के लोग कर्मकांड का काम किया करते थे. सार्वजनिक बगीचा भी था. जहां खलिहान का काम लिया जाता था. बाद में उसे श्मशान की भूमि बना दी गयी. तब से लेकर आज तक उक्त जमीन पर यही काम होता आया है.

1995 में हो गयी जमीन की बिक्री

इमिलिया मौजा में स्थित उक्त जमीन को वर्ष 1995 में इमिलिया निवासी कुंदन भगत के पुत्र जुड़ावन भगत ने अपने ही गांव के पूरण भगत के पुत्र चौरी भगत और श्यामलाल भगत के नाम से बैनामा कर दी. 19 अगस्त 1995 को यह रजिस्ट्री तहरीर की गई. इसकी डीड संख्या 1286 थी. तब से लेकर उस जमीन पर किसी ने कोई दावा नहीं किया था. लेकिन जब जमीन की जमाबंदी क्रेता के परिवार के नाम से दर्ज की गयी, तो उसे पर दावा किया जाने लगा.

जमीन रजिस्ट्री होने के 24 साल बाद दाखिल-खारिज का किया गया आवेदन

12 अगस्त 1995 को इस जमीन की खरीद-बिक्री हो गयी ,तो उसके 24 साल बाद 26 जुलाई 2019 को चौरी भगत के लड़के हीरालाल भगत ने जमाबंदी के लिए आवेदन किया था. हैरत की बात यह रही कि जिस जमाबंदी का कार्य सालों साल नहीं हो रहा है, वो जमाबंदी तीन माह के अंदर की गयी. इस मामले में 22 अक्टूबर 2019 को तब सीओ रहे जितेंद्र कुमार सिंह ने जमाबंदी कायम कर दी. इस जमीन को राजस्व कर्मचारी महेश कुमार सिंह और राजस्व अधिकारी चंद्रशेखर गुप्ता की रिपोर्ट को आधार मानते हुए जमाबंदी की गयी.

जमाबंदी में सीओ की रिपोर्ट चौंकाने वाली

इमिलिया मौजा में जमीन की जमाबंदी के केस नंबर 469/19-20 में सीओ जितेंद्र कुमार सिंह ने जो रिपोर्ट दी, वो काफी चौंकाने वाली थी. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि हल्का कर्मचारी अंचल निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन से ज्ञात होता है कि प्रतिवेदित भूमि शांतिपूर्ण कब्जे में है. सीओ ने बताया है कि यह जमीन गैर मजरूआ आम गैर मजरूआ खास, आम, श्मशान और अन्य उपयोग उपयोग की भूमि नहीं है. सरकारी जमीन को बड़ी चालाकी से वर्ष 1995 में बेच दिया गया. मामला ठंडा होने तक 24 वर्षों तक खारिज दाखिल के लिए अप्लाइ नहीं किया गया लेकिन वर्ष 2019 में सीओ जितेंद्र कुमार सिंह के कार्यकाल में इसकी जमाबंदी कर दी गयी.

जमीन पर कब्जा को लेकर हुआ विवाद

यह मामला तब सामने आया, जब जमाबंदी और डीड के आधार पर जमीन को लिखवाने वाले ने उसको कब्जा करना शुरू किया, तो गांव के लोगों ने इसकी जानकारी सीओ अनुभव राय को दी. सूचना मिलने के बाद सीओ अनुभव राय के द्वारा जांच की बात कही गयी. लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है. हालांकि ग्रामीणों के इस आरोप में कितनी सच्चाई है यह उच्च स्तरीय जांच से ही पता चलेगा. इस संबंध में सीओ अनुभव राय ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा जानकारी दी गयी है. मामले की जांच की जा रही है, अगर ऐसा हुआ है तो जमाबंदी रद्द की जायेगी.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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