गोपालगंज समेत बिहार के स्कूलों में स्वच्छता की पाठशाला, मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत बच्चों को मिला प्रशिक्षण

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विद्यालय में अच्छी तरह से हाथ धोने का तरीका सीखते बच्चे

विद्यालय में अच्छी तरह से हाथ धोने का तरीका सीखते बच्चे

Gopalganj Government School : गोपालगंज के सरकारी स्कूलों में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत बच्चों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के गुर सिखाए जा रहे हैं. हाथ धुलाई की सही विधि से लेकर व्यक्तिगत स्वच्छता तक, यह अभियान बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

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Gopalganj Government School : मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जुलाई माह के तृतीय शनिवार को गोपालगंज समेत बिहार के प्रारंभिक विद्यालयों में विशेष स्वच्छता एवं स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं. इस दौरान विद्यार्थियों को हाथ धुलाई, व्यक्तिगत स्वच्छता, विद्यालय एवं आसपास की साफ-सफाई, शौचालय के नियमित उपयोग तथा कचरा प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है. फोकल शिक्षक एवं बाल प्रेरक चर्चा, प्रदर्शन और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक बना रहे हैं तथा उन्हें इन आदतों को दैनिक जीवन में अपनाने का अभ्यास भी करा रहे हैं.

हाथ धुलाई की सही विधि पर विशेष जोर

विद्यालयों में बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में साबुन अथवा सर्फ के घोल और स्वच्छ पानी की व्यवस्था करने पर बल दिया जा रहा है. विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि मध्याह्न भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है. उन्हें हाथ धोने की सही विधि भी सिखाई जा रही है. इसके तहत दोनों हथेलियों, उंगलियों के बीच, नाखूनों तथा हाथों के सभी हिस्सों को अच्छी तरह रगड़कर साफ करने और अंत में स्वच्छ पानी से धोने का अभ्यास कराया जा रहा है. साथ ही मध्याह्न भोजन बनाने और परोसने वाले कर्मियों को भी साबुन से हाथ साफ करने की आवश्यकता बताई जा रही है.

व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतें विकसित करने का प्रयास

बच्चों को प्रतिदिन दांत साफ करने, नियमित स्नान करने, बालों की सफाई रखने, समय-समय पर नाखून काटने तथा कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में डालने की सीख दी जा रही है. बालिकाओं को मासिक धर्म के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता संबंधी आवश्यक जानकारी महिला शिक्षिकाओं द्वारा दी जा रही है. इसके अलावा विद्यार्थियों को यह भी बताया जा रहा है कि भोजन से पहले, शौच के बाद, खेलने के बाद, जानवरों को छूने के बाद, स्कूल पहुंचने और सार्वजनिक स्थानों से लौटने के बाद हाथ धोना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.

स्वच्छ विद्यालय और सुरक्षित शौचालय पर भी फोकस

कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त पानी, साबुन, उचित रोशनी और वेंटिलेशन की व्यवस्था के महत्व पर जानकारी दी जा रही है. दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम शौचालय, लड़कियों के शौचालय में ढक्कनयुक्त कूड़ेदान तथा विद्यालय में सुरक्षित स्थान पर पैड बैंक की आवश्यकता भी बतायी जा रही है. साथ ही विद्यालय परिसर, पुस्तकालय, कक्षाओं, दरवाजों और खिड़कियों की नियमित सफाई तथा कचरे के सुरक्षित निबटान का अभ्यास कराया जा रहा है.

विद्यार्थियों में स्वच्छता संबंधी व्यवहार विकसित करने की पहल

विद्यालयों में यह भी समझाया जा रहा है कि खुले में शौच, गंदे हाथ, दूषित पानी, मक्खी-मच्छरों और खुले खाद्य पदार्थों के माध्यम से संक्रमण फैल सकता है. ऐसे में स्वच्छता अपनाकर कई बीमारियों से बचाव संभव है. अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता संबंधी व्यवहार विकसित करना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है.

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