गोपालगंज में TRE-3 के तहत NIOS डीएलएड प्रशिक्षित एक भी शिक्षक नहीं, सभी प्रखंडों ने भेजी शून्य रिपोर्ट
जिला शिक्षा कार्यालय
गोपालगंज जिले में 2024 की TRE-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा के तहत NIOS से 18 महीने का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त कोई भी शिक्षक कार्यरत नहीं है. सभी प्रखंडों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या शून्य बताई गई है. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि गलत सूचना देने पर संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों पर कार्रवाई होगी.
गोपालगंज: जिले में वर्ष 2024 की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के तहत नियुक्त ऐसे एक भी विद्यालय अध्यापक या अध्यापिका कार्यरत नहीं हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) से 18 माह का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया हो. यह जानकारी जिले के सभी प्रखंडों से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर शिक्षा विभाग ने राज्य मुख्यालय को भेजी है. हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर गलत सूचना या तथ्य छिपाने का मामला सामने आता है तो संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
20 जुलाई को मांगी गई थी रिपोर्ट
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने बताया कि 20 जुलाई को सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को दो दिनों के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था. विभाग ने पूछा था कि वर्ष 2024 में TRE-3 के तहत नियुक्त ऐसे कितने शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने NIOS से 18 माह का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया है. निर्धारित समय के भीतर सभी प्रखंडों से प्राप्त रिपोर्ट में ऐसे शिक्षकों की संख्या शून्य बताई गई.
प्रखंडों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार हुआ जिला प्रतिवेदन
स्थापना डीपीओ ने बताया कि सभी प्रखंडों से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर जिला स्तरीय रिपोर्ट तैयार कर राज्य शिक्षा विभाग को भेज दी गई है. वर्तमान में जिले के किसी भी सरकारी विद्यालय में TRE-3 के तहत NIOS से 18 माह का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक या शिक्षिका की नियुक्ति दर्ज नहीं है.
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गलत सूचना देने पर होगी विभागीय कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल रिपोर्ट प्राप्त होने से प्रक्रिया समाप्त नहीं होती. जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि भेजी गई जानकारी सेवा पुस्तिका, नियुक्ति अभिलेख और प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेजों से पूरी तरह मेल खानी चाहिए. यदि बाद में जांच के दौरान किसी भी प्रखंड की रिपोर्ट गलत, भ्रामक या तथ्य छिपाने वाली पाई जाती है तो संबंधित बीईओ के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
रिकॉर्ड का मिलान कर भेजी गई रिपोर्ट
विभाग का कहना है कि राज्य स्तर पर मांगी जाने वाली सूचनाओं की प्रमाणिकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. इसी कारण सभी प्रखंडों को विद्यालयों के अभिलेख, नियुक्ति विवरण और प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों का मिलान करने के बाद ही रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया था. विभाग का मानना है कि इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के प्रशासनिक या कानूनी विवाद से बचा जा सकेगा.
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By Prabhat Khabar News Desk
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