गोपालगंज में दो साल से विद्यालय से गायब पंचायत शिक्षक पर कार्रवाई की मांग, डीईओ को भेजा गया आवेदन

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जिला शिक्षा कार्यालय

गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड में एक पंचायत शिक्षक करीब दो साल से बिना सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित हैं. प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि इससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

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गोपालगंज: गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड स्थित एनपीएस सनाहा माधो में कार्यरत पंचायत शिक्षक संदीप कुमार के करीब दो वर्षों से बिना सूचना विद्यालय से अनुपस्थित रहने का मामला एक बार फिर शिक्षा विभाग तक पहुंच गया है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अमरेंद्र कुमार पाण्डेय को आवेदन भेजकर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई करने तथा मामले का शीघ्र निष्पादन कराने की मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से शिक्षक के विद्यालय नहीं आने से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

22 जुलाई 2024 से लगातार अनुपस्थित

प्रधानाध्यापक द्वारा भेजे गए आवेदन में कहा गया है कि पंचायत शिक्षक संदीप कुमार 22 जुलाई 2024 से बिना किसी पूर्व सूचना के विद्यालय से लगातार अनुपस्थित हैं. उन्होंने न तो विद्यालय प्रशासन को अनुपस्थिति की जानकारी दी और न ही अवकाश के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया. इस संबंध में पहले भी पंचायत नियोजन इकाई बैरिया दुर्ग तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, उचकागांव को लिखित रूप से सूचित किया जा चुका है. इसके बावजूद अब तक मामले का अंतिम निष्पादन नहीं हो सका है.

बीएड प्रमाणपत्र की जांच का भी जिक्र

प्रधानाध्यापक ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि संबंधित शिक्षक के बीएड प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर विभागीय स्तर पर पहले से जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में करीब दो वर्षों तक बिना सूचना अनुपस्थित रहने के मामले को भी गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है. उनका कहना है कि मामले के शीघ्र निष्पादन से विद्यालय में शिक्षकों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

शिक्षक समायोजन प्रक्रिया पर भी असर

आवेदन में राज्य सरकार की शिक्षक समायोजन प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है. प्रधानाध्यापक का कहना है कि कई विद्यालयों में शिक्षकों की अधिकता दर्शाई जा रही है, जबकि उनके विद्यालय में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित है. लंबे समय से एक शिक्षक के अनुपस्थित रहने के बावजूद पद रिक्त नहीं माना जा रहा है. इससे विद्यालय की वास्तविक आवश्यकता सामने नहीं आ पा रही है और समायोजन प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है.

डीईओ के निर्णय का इंतजार

प्रधानाध्यापक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है. फिलहाल मामला डीईओ के संज्ञान में है. अब शिक्षा विभाग की जांच और निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पंचायत शिक्षक के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी. विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और ग्रामीण भी विभागीय निर्णय का इंतजार कर रहे हैं.

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