Gopalganj News : पटाखों में विस्फोट हुआ, तो मच सकती है बड़ी तबाही, शहर में 32 दुकानदारों ने दिया लाइसेंस के लिए आवेदन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Oct 2024 10:29 PM
Gopalganj News : सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद जिले में पटाखों के अवैध भंडारण पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है. अधिकारियों की लापरवाही से इस धंधे से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं और वे थोड़े से फायदे के लिए आम लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं.
गोपालगंज. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद जिले में पटाखों के अवैध भंडारण पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है. अधिकारियों की लापरवाही से इस धंधे से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं और वे थोड़े से फायदे के लिए आम लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं. जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आ रही है, शहर के कई इलाकों में बारूद का कारोबार तेजी से फलने फूलने लगा है. दीपावली पर जमकर आतिशबाजी होती है. लेकिन लोग यह भूल जाते हैं कि इससे न सिर्फ सेहत को नुकसान पहुंचता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी खतरनाक है. लोगों की गहरी रुचि को देखते हुए कारोबारी बिना लाइसेंस घनी आबादी के बीच घरों में चोरी-छिपे पटाखाें का निर्माण और भंडारण कर रहे हैं. दीपावली पर बिकने वाले सुतली बम इसके प्रमाण हैं. इस पर न फैक्ट्री का नाम होता, न लाइसेंस संख्या. कम खर्च में निर्माण और कई गुना दाम में पटाखे की बिक्री के चक्कर में कारोबारी लोगों की जान से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते हैं. दीपावली में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन पटाखों के अवैध भंडारण और निर्माण के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया गया है. हर बार घटना होने के बाद पुलिस प्रशासन जागता है. डीएम प्रशांत कुमार सीएच की ओर से दोनों अनुमंडल पदाधिकारियों को लाइसेंस जारी करने का आदेश दिया गया है. ऐसे में सदर अनुमंडल में 32 आवेदन पटाखाें की अस्थायी दुकान के लिए आवेदन आये हैं. वहीं हथुआ में एक भी दुकान के लिए आवेदन नहीं आया है. तो बगैर लाइसेंस के दुकानें हथुआ अनुमंडल में सज चुकी हैं. ग्रामीण इलाकों तक फैला जाल शहर ही नहीं, पटाखों के अवैध भंडारण और निर्माण का जाल ग्रामीण इलाकों तक फैल चुका है. शहर के कई इलाके तो बारूद के ढेर में तब्दील हो चुके हैं. इनमें थाना रोड, मीरगंज, बरौली जैसे शहरी क्षेत्रों के अलावा सासामुसा, बथुआ बाजार, श्रीपुर, विजयीपुर, हथुआ, नरहवां बाजार, कटेया जैसे ग्रामीण इलाके भी शामिल हैं. बारूद में खुद का घर उजड़े या पड़ोसी का, कारोबारियों को इससे कोई मतलब नहीं. उन्हें तो दीपावली पर सिर्फ ज्यादा से ज्यादा कमाई नजर आती है. ऐसे कारोबारी जान की परवाह किए बगैर परिवार की महिलाओं और बच्चाें को भी बारूद के ढेर पर बैठा देते हैं. साथ ही पड़ोसियों को भी मुसीबत में डाल देते हैं. वहीं सदर एसडीओ डॉ प्रदीप कुमार ने बताया कि अवैध रूप से पटाखा बेचने वाले व भंडारण करने वालों पर प्रशासन के स्तर पर सख्ती से कार्रवाई करने का आदेश दिये गये हैं, जहां से भी सूचना मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई होगी.
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