गोपालगंज में नए डीईओ अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय का पहला बड़ा प्रशासनिक फैसला, तीन डीपीओ के बीच बांटी जिम्मेदारियां

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एक कार्यक्रम में एक साथ दीप प्रज्वलित करते नए अधिकारी | Prabhat Khabar

Gopalganj News: गोपालगंज के नए जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने पदभार संभालते ही बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. स्थापना, समग्र शिक्षा, योजना-लेखा और एमडीएम शाखाओं का अलग-अलग प्रभार तीन डीपीओ को सौंपा गया है.

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Gopalganj News: जिले के शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक बदलाव के बाद नई टीम पूरी तरह सक्रिय हो गई है. नए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद पहला बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए तीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) के बीच विभिन्न शाखाओं का प्रभार बांट दिया है. गुरुवार को जारी कार्यालय आदेश के साथ नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई.

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रोहतास से आए नए डीईओ, नई टीम ने संभाली कमान

शिक्षा विभाग की अधिसूचना के तहत रोहतास से स्थानांतरित होकर आए अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने हाल ही में गोपालगंज के डीईओ का पदभार संभाला है. वहीं बांका से आए विनय कुमार सुमन और बेगूसराय से आए शिवम ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) के रूप में योगदान दिया है. इससे पहले लखीन्द्र दास पदोन्नति के बाद डीपीओ के रूप में योगदान दे चुके हैं.

किस अधिकारी को मिली कौन-सी जिम्मेदारी

डीईओ के आदेश के अनुसार—

  • डीपीओ विनय कुमार सुमन को स्थापना शाखा, माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता का प्रभार सौंपा गया है.
  • डीपीओ शिवम को समग्र शिक्षा अभियान, योजना एवं लेखा शाखा की जिम्मेदारी दी गई है.
  • डीपीओ लखीन्द्र दास को मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) का दायित्व सौंपा गया है.

सभी अधिकारियों को तत्काल अपने-अपने शाखाओं का कार्यभार संभालने और लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.

नई टीम के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

नई प्रशासनिक टीम के सामने लंबित फाइलों का निपटारा, शिक्षकों से जुड़े प्रशासनिक मामलों का समाधान, सरकारी योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग, विद्यालयों का नियमित निरीक्षण और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसी अहम जिम्मेदारियां होंगी.

जवाबदेही बढ़ने और काम में तेजी की उम्मीद

कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था जिला पदाधिकारी के अगले आदेश या अनुमोदन तक प्रभावी रहेगी. शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि शाखाओं का स्पष्ट बंटवारा होने से जवाबदेही बढ़ेगी और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी.

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