Gopalganj News : कोर्ट को रिकवरी एजेंसी ना समझें बैंक, डाटा के साथ लोक अदालत में रहें मुस्तैद

Updated at : 08 Mar 2025 9:04 PM (IST)
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Gopalganj News : कोर्ट को रिकवरी एजेंसी ना समझें बैंक, डाटा के साथ लोक अदालत में रहें मुस्तैद

नेशनल लोक अदालत को बैंक अपनी रिकवरी एजेंसी ना समझें. लोक अदालत की नोटिस थमा कर टॉर्चर ना करें. बैंक के शाखा प्रबंधक को भी मुस्तैद होकर रहना चाहिए. बैंक के कई प्रबंधक अपने स्टाफ को लगाकर खुद गायब रहते हैं. बैंक कर्मी के पास डाटा नहीं होता. लोनी को बाद में बैंक बुलाया जाता है तो इस अदालत का औचित्य क्या है.

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गोपालगंज. नेशनल लोक अदालत को बैंक अपनी रिकवरी एजेंसी ना समझें. लोक अदालत की नोटिस थमा कर टॉर्चर ना करें. बैंक के शाखा प्रबंधक को भी मुस्तैद होकर रहना चाहिए. बैंक के कई प्रबंधक अपने स्टाफ को लगाकर खुद गायब रहते हैं. बैंक कर्मी के पास डाटा नहीं होता. लोनी को बाद में बैंक बुलाया जाता है तो इस अदालत का औचित्य क्या है. शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र बहादुर सिंह, एडीजे वन आशुतोष कुमार पांडेय, एडीजे-10 मानवेंद्र मिश्र, सचिव अनूप कुमार उपाध्याय, डीएम प्रशांत कुमार सीएच, एसपी अवधेश दीक्षित, जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार मिश्र उर्फ मुन्ना मिश्र, महासचिव मनोज कुमार मिश्र ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एडीजे मानवेंद्र मिश्र ने कहा कि लोक अदालत में नहीं आने वाले बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए कोर्ट लिखेगा. अधिकारियों को कैंसर, एड्स पीड़ित, सड़क एक्सीडेंट व गंभीर परिस्थिति से गुजरने वालों को राहत देनी चाहिए. ऐसे लाचार लोगों को बैंक के अधिकारी अधिक-से- अधिक छूट देकर समझौता कराएं. गरीबों को राहत दें. प्रधानमंत्री भी गरीब व किसानों के खाते में राशि भेजते हैं. वहीं डीएम प्रशांत कुमार सीएच ने लोक अदालत में आने वाली महिलाओं को महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि लोक अदालत की अच्छी बात यह है कि यहां समझौते से विवादों का समापन होता है. यहां आपसी प्रेम-भाईचारे के बीच विवाद समाप्त किया जाता है. यहां जो मामले समझौते से निपट जाते हैं, उनका अपील नहीं होता. केस का चक्र खत्म हो जाता है. यहां आने वाले की कभी हार-जीत नहीं होती. प्रशासन भी नियमित रूप से समीक्षा करता है कि कौन से केस में समझौता हो सकता है. सरकार की ओर से भी लोक अदालत में आने वाले मामलों के समझौते में सहयोग किया जाता है.

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