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गोपालगंज में शुरू हुआ ऑटोमेटिक गुड़ प्लांट, किसानों के लिए खुला कमाई का नया रास्ता

Updated at : 09 Mar 2026 10:01 AM (IST)
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Gopalganj Automatic Jaggery Plant

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार के गोपालगंज जिले में राज्य का पहला ऑटोमेटिक गुड़ निर्माण प्लांट शुरू हो गया है. करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट में रोजाना 100 टन गन्ने की पेराई होगी. इससे न सिर्फ गुड़ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि इलाके के गन्ना किसानों के लिए आय के नए अवसर भी खुलेंगे.

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Bihar News: गोपालगंज जिले के पंचदेवरी प्रखंड स्थित खालगांव में सूबे का पहला अत्याधुनिक ऑटोमेटिक गुड़ निर्माण प्लांट (हर्षवर्धन इंडस्ट्रीज) शुरू हो गया है.

रविवार को गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने फीता काटकर इस हाई-टेक यूनिट का उद्घाटन किया. कभी चीनी मिलों के बंद होने से मायूस हो चुके इस इलाके के किसानों के लिए यह प्लांट किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है.

15 करोड़ की लागत से बना आधुनिक गुड़ प्लांट

बिहार सरकार के गुड़ उद्योग प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ जमीन पर इस ऑटोमेटिक प्लांट का निर्माण किया गया है. आधुनिक तकनीक से लैस इस प्लांट में प्रतिदिन लगभग 100 टन गन्ने की पेराई की जाएगी, जिससे करीब 13 टन से अधिक गुड़ का उत्पादन संभव होगा. यह प्लांट राज्य में गुड़ उद्योग को आधुनिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

गोपालगंज और आसपास के इलाके में कई चीनी मिलें बंद होने के कारण पिछले दो दशकों में गन्ना खेती का उत्पादन काफी घट गया था. ऐसे में इस ऑटोमेटिक गुड़ प्लांट के शुरू होने से किसानों में उत्साह का माहौल है. स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि गन्ने की खरीद सुनिश्चित हुई तो वे फिर से बड़े पैमाने पर गन्ना खेती की ओर लौट सकते हैं.

सरकार की योजनाओं से किसानों को जोड़ने की पहल

उद्घाटन समारोह के दौरान अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने किसानों को गन्ना खेती के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है और किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं की जानकारी समय-समय पर दी जाए.

गोपालगंज में शुरू हुआ यह ऑटोमेटिक गुड़ प्लांट न केवल स्थानीय किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है, बल्कि बिहार में पारंपरिक गुड़ उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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