लाश को मिले तिरंगा, तो मर कर भी जी जाऊंगा

Published at :08 May 2017 5:41 AM (IST)
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लाश को मिले तिरंगा, तो मर कर भी जी जाऊंगा

गोपालगंज : संडे की शाम हास्य व व्यंग्य की फुहारों से महफिल सराबोर हो गयी. एक से बढ़ कर एक रचना लोगों के दिलों को छू गयी. हंसी और ठहाकों के बीच वक्त कैसे गुजर गया, पता ही नहीं चला. मौका था शहर के सिनेमा रोड में स्थित आशीर्वाद वाटिका में प्रभात खबर की तरफ […]

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गोपालगंज : संडे की शाम हास्य व व्यंग्य की फुहारों से महफिल सराबोर हो गयी. एक से बढ़ कर एक रचना लोगों के दिलों को छू गयी. हंसी और ठहाकों के बीच वक्त कैसे गुजर गया, पता ही नहीं चला. मौका था शहर के सिनेमा रोड में स्थित आशीर्वाद वाटिका में प्रभात खबर की तरफ से आयोजित हास्य कवि सम्मेलन का.

कवि सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से सामाज को एक नयी दिशा दिखाने का काम किया. कवियों ने देश के वर्तमान हालात, राजनीतिक परिदृश्य, सामाजिक संरचना में आयी विकृति पर जहां चोट पहुंचायी, वहीं देश की समृद्धशाली संस्कृति, विलुप्त हो रही भोजपुरी परंपरा, साहित्य और सभ्यता को बचाने की अपील भी की. इसके पूर्व हास्य कवि सम्मेलन का विधिवत रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया गया. उद्घाटन समारोह में आये मुख्य अतिथि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामअवध प्रसाद ने कहा कि आज काम का बोझ, जिंदगी की भाग दौड़ और तनाव के बीच प्रभात खबर की तरफ से शहर में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन काफी सराहनीय कदम है. विशिष्ट अतिथि शक्ति साधना पीठम विंध्याचल से पहुंचे धर्मगुरु डाॅ अखिलानंद शास्त्री ने कहा कि हास्य कवि सम्मेलन स्वस्थ मनोरंजन का माध्यम है.

सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि देश की वर्तमान स्थिति का चित्रण और समाज की जवाबदेही बताने की बखूबी काम हमारे कवि कर रहे हैं. उद्घाटन समारोह के साथ ही द लाफ्टर चैलेंज एवं सावधान इंडिया में धूम मचा चुके हास्य के देश में ख्याति प्राप्त कवि दिनेश बाबरा ने कुछ ही पल की एक कहानी सुन कर अगर अभिमन्यु चक्रव्यूह तोड़ कर अंदर जा सकता है, तो दिन रात गाना सुननेवाला बच्चा गाना नहीं गा सकता. ‘मेरी मां ने कभी प्रहलाद की भक्ति गाथा सुनी होती, कभी रामायण की चौपाई धुनी होती, कभी ऊं जय जगदीश हरे गाया होता, कभी श्रीमद्भागवत गीता को हाथ लगाया होता, तब तो मैं राम-रहीम के संस्कार को लेकर आया होता’…की रचना ने सबको वर्तमान समाज की व्यथा पर चोट पहुंचायी.

वहीं, राजस्थान जयपुर से पहुंचे ओज और वीर रस के प्रमुख कवि अशोक चारण ने देश के वर्तमान हालात पर अपनी रचना ‘ये जहरीला घूंट कसम से हंस कर पी जाऊंगा, मेरी लाश को मिले तिरंगा, तो मर कर भी जी जाऊंगा’…भगीरथ बन मैं लाया हूं मन की गंगे को, उसकी आंखें मुझे तकती, मेरी तके तिरंगे को’ जब प्रस्तुत किया, तो न सिर्फ महफिल में बैठे लोगों का अंतर्मन जग गया, बल्कि सभी भृकुटी तन गयी. चार घंटे तक चले कवि सम्मेलन में साहित्य, हास्य, व्यंग के साथ-साथ वर्तमान परिवेश का भी चित्रण हुआ. कवि सम्मेलन में दिल्ली की पद्मिनी शर्मा, उत्तर प्रदेश के अखिलेख द्विवेदी, राजस्थान के अशोक चरण, मध्यप्रदेश के अशोक सुंदरानी आदि देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचना पेश की.

नापाक जुबान से कभी भारत की जय नहीं बोली जाती…

मध्यप्रदेश के सतना से आये हास्य के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध कवि अशोक सुंदरवानी ने अपनी रचना ‘बेइमानी की संपत्ति को कभी ईमानदारी की तराजू में नहीं तौली जाती, नापाक जुबान से कभी भारत माता की जय नहीं बोली जाती’…जैसी रचना को प्रस्तुत कर कवि सम्मेलन को एक नयी ऊंचाई देने का काम किया. अशोक सुंदरवानी के हर शब्द पर लोग ठहाका लगाते रहे. पहली बार ‘प्रभात खबर’ की तरफ से आयोजित हास्य कवि सम्मेलन में अशोक सुंदरवानी गोपालगंज पहुंचे थे.

सफलता में प्रायोजकों का सराहनीय योगदान

हास्य कवि सम्मेलन की सफलता के लिए प्रायोजकों का सहयोग सराहनीय रहा. कार्यक्रम के लिए हमारे विशिष्ट सहयोगी हरिओम फिड्स, रामकृष्ण ज्वेलर्स मेन रोड, माड़वाड़ी मुहल्ला, आरएम पब्लिक स्कूल विशंभरपुर धर्मपरसा, शहर के नार्थ प्वाइंट, सेंट जेवियर्स स्कूल, ठाकुर सुजूकी, जादोपुर रोड स्थित राजधानी फर्नीचर, डाॅ अमर कुमार अर्थोपिडिक एंड स्पाइन सर्जर, श्री राघव ऑटो मोबाइल्स पियाजियो छवहीं खास, एक्सेल पब्लिक स्कूल लखपतिया चौक, ए टू प्लस हॉस्पिटल न्यूरो मेडिकल इमरजेंसी, हॉस्पिटल चौक, आचार्य श्री सेंट्रल पब्लिक स्कूल रामनरेश नगर, इसमें हर किसी का सहयोग अहम रहा. इनके सहयोग से ही हास्य कवि सम्मेलन को सफल रहा.

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