रांची कीे चंदन तिवारी के भोजपुरी गीत पर झूमते रहे दर्शक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Apr 2017 3:57 AM (IST)
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गल मीठी मीठी बोल, बजने दे तासे ढोल… मां सिंहासनी के दरबार में मुंबई से आये कलाकारों ने बांधा समां मुंबई से पहुंचे तोची रैना ने थावे महोत्सव में लगाया चार चांद थावे : टूटे ना चरखा के तार, चरखा चालू रहे, थावे महोत्सव में रांची से पहुंची प्रसिद्ध भोजपुर गायिका चंदन तिवारी महात्मा गांधी […]
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गल मीठी मीठी बोल, बजने दे तासे ढोल…
मां सिंहासनी के दरबार में मुंबई से आये कलाकारों ने बांधा समां
मुंबई से पहुंचे तोची रैना ने थावे महोत्सव में लगाया चार चांद
थावे : टूटे ना चरखा के तार, चरखा चालू रहे, थावे महोत्सव में रांची से पहुंची प्रसिद्ध भोजपुर गायिका चंदन तिवारी महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह आंदोलन की याद कराते हुए अपनी प्रस्तुति से सबके दिलों पर छा गयीं. उन्होंने मां भगवती की अाराधना करते हुए पारंपरिक देवी पचरा से कार्यक्रम की शुरुआत की. गंगा जी के मटिया मंगइले बानी, ए मइया मोरी लाले पियरे आसन लगइले बानी, रउरे के बोलवले बानी… से श्रोता भक्ति की सागर में गोता लगाने लगे, जबकि दूसरा पचरा काथी केरा ककही थावे मइया, काथी केरा रे साल, काथी रे बैठल थावे मइया… गंवई परंपरा को इस गीत से महोत्सव में जान डाल दी.
निमिया के ढाढी मइया, लावेली हिलोरवा की झूली झूली ना… से दर्शक भाव विभोर हो गये. चैती एही ठइया मोतिया हेराइल हे रामा, कहवां मैं ढूंढु. चैती की प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे. थावे महोत्सव में जैसे-जैसे रात बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता जा रहा था. भोजपुरी पूर्वी के महान गीतकार महेंद्र मिश्र के लिखित गीत केहु गोदवाई का गोदनवा की प्रस्तुति ने भोजपुरी के सारगार्भित संस्कृति को संदेश दिया. आजमगढी रइता आंख जैसा आंख नहीं है, काजल का दिल करता है, ऐ बाबू करीखा लगाइल फिर ना आयी जवानी… से युवाओं में ऊर्जा भरने का काम किया. भीखारी ठाकुर की रचना अजबे बनवलू चलनिया हे,
ओढ़नी तरके जननिया तथा बाबा के भवनवा से कइके गवनवा रे सजनवा, बिया गइले पूरब के पयनवा रे सजनवा… की प्रस्तुति से भिखारी ठाकुर की रचना को भी बल दिया, जबकि कार्यक्रम में दर्शकों की डिमांड पर ठुमरी की प्रस्तुति करते हुए हमरी अटरिया पर आजा रे सवरिया, देखा देखी बलम होयी जायी… रंगी साड़ी गुलाबी चुनिया रे मोहे मारे सवरिया नजरिया रे…
निर्गुण झुलनी के रंग सांचा हमार पिया, आज घर अइले हमार पिया, तथा मारिसस में जिस गीत को लेकर चंदन तिवारी ने आवार्ड पाया, उसकी प्रस्तुति बेटी चिरइया के गीत चंदा मामा आरे आव पारे आव, नदी के किनारे आव, सोने के कटोरिया में दूध भात लेले आव…. की प्रस्तुती कर वातसल्य प्रेम को दरसाते हुए दर्शकों पर छा गयी.
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