यूजीसी के पास बकाया नहीं रहेगा एक पैसा : प्रो वेद प्रकाश

यूजीसी के पास बकाया नहीं रहेगा एक पैसा : प्रो वेद प्रकाश यूजीसी से चेयरमैन ने दिया ‘की नोट्स एड्रेस’ उद्योग शिक्षा की मांग के अनुसार उच्च शिक्षा हो विकसितउच्च शिक्षा के विकास के लिए एक ऐसा ‘रियलिस्टिक रोडमैप’ बनाना होगा, जिसमें ‘मिडटर्म करेक्शन’ की भी गुंजाइश हो. गुणवत्ता पर किसी कीमत पर किसी भी […]
यूजीसी के पास बकाया नहीं रहेगा एक पैसा : प्रो वेद प्रकाश यूजीसी से चेयरमैन ने दिया ‘की नोट्स एड्रेस’ उद्योग शिक्षा की मांग के अनुसार उच्च शिक्षा हो विकसितउच्च शिक्षा के विकास के लिए एक ऐसा ‘रियलिस्टिक रोडमैप’ बनाना होगा, जिसमें ‘मिडटर्म करेक्शन’ की भी गुंजाइश हो. गुणवत्ता पर किसी कीमत पर किसी भी प्रकार का समझौता किया जाना राज्यहित और देशहित में नहीं सभी कुलपतियों ने रखा प्रजेंटेशनसंवाददाता, पटनाविश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन प्रो. वेद प्रकाश ने विश्वविद्यालयों को यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देने और विकास कार्यों के लिए पैसा लेने का निर्देश दिया है. राजभवन में कुलपतियों की बैठक में प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि यूजीसी के पास विश्वविद्यालयों का एक पैसा बकाया नहीं रहेगा. विश्वविद्यालय उपयोगिता प्रमाण पत्र दें, उन्हें राशि का भुगतान कर दिया जायेगा. यूजीसी के चेयरमैन ने कहा कि उद्योग जगत भारतीय विश्वविद्यालय की ओर काफी आशा भरी निगाहों से देख रहा है. विश्वविद्यालयों को उद्योग क्षेत्र की मांग के अनुसार उच्च शिक्षा क्षेत्र को विकसित करना चाहिए. उन्होंने व्यवसायिक शिक्षा के साथ-साथ, भाषा विकास, मानविकी और सामाजिक विज्ञान क्षेत्र में भी विश्वविद्यालयों को अधिक बेेहतर प्रयास करने की अपील की . उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए इन क्षेत्रों पर ध्यान देना ही होगा. साथ ही विश्वविद्यालयों में ललित कला, स्पोर्ट्स, योग आदि के कोर्स भी लागू किए जाये. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ शिक्षा के व्यापक संदर्भों को ग्रहण करना चाहिए और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा देते हुए अपने व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों को भी पूरा करना चाहिए. पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों अपने सद्भावपूर्ण एक दूसरे से जुड़े रहकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नयी क्रांति ला सकते हैं. प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि बिहार शुरू से ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सत्य का केन्द्र रहा है. नालंदा विश्वविद्यालय की यहां समृद्ध विरासत रही है. शोधार्थियों को ग्रामीण बस्तियों में जाकर अपने शोध कार्योें में जमीनी हकीकत को सामने लाना चाहिए. यूजीसी के चेयमैन ने कहा कि उच्च शिक्षा के विकास के लिए एक ऐसा ‘रियलिस्टिक रोडमैप’ बनाना होगा जिसमें ‘मिडटर्म करेक्शन’ की भी गुंजाइश हो. उन्होंने ‘नैक मूल्यांकन’ और यूजीसी मानदंडों के अनुरूप विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों की नियुक्ति पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता पर किसी कीमत पर किसी भी प्रकार का समझौता किया जाना राज्यहित और देशहित में नहीं है. उन्होंने नयी शिक्षण संस्थाएं खोलने और कम लागत वाली उच्च शिक्षा गरीबों को भी उपलब्ध कराने पर जोर दिया. प्रो. वेद प्रकाश ने कहा कि यूनिवर्सिटी को यूनिवर्सल नॉलेज प्रदान करने वाला केन्द्र होना चाहिए, जहां से ऐसे कौशलयुक्त युवा निकलें, जो बाजार की उपयोगिताओं को भी पूरा कर सकें और व्यापक मानवीय और सामाजिक हितों के पैमाने पर भी खरे उतरने वालें हों. कुलपतियों के सम्मेलन के दौरान बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति पंडित प्रभाकर पलांडे ने ‘च्वाएस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम’ के अंतर्गत सेमेस्टर सिस्टम व्यवस्था और ‘नैक इवैल्यूशन’, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मो. इश्तियाक ने ‘एकेडमिक और एक्जामिनेशन कैलेण्डर’, ललित नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने ‘स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और बीएड प्रवेश परीक्षा’, तिकला मांझी विश्वविद्यालय भागलपुर के कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे ने कॉलेजों को ‘सेंटर ऑफ एक्सेलेंस’ के रूप में विकसित किए जाने, जेपी विश्वविद्यालय, छपरा के प्रभारी कुलपति प्रो. लोकेश चन्द्र प्रसाद ने महाविद्यालयों के एफिलियेशन और नालंदा ओपेन यूनिवर्सिटी के प्रतिकुलपति आर. के. उपाध्याय ने दूरस्थ शिक्षा विषय पर अपना प्रजेन्टेशन दिया.
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