अब महादलितों के घर में नहीं गूंजती रेडियो की आवाज

Updated at :09 Jan 2016 1:00 AM
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अब महादलितों के घर में नहीं गूंजती रेडियो की आवाज

गोपालगंज : मुख्यमंत्री की ओर से महादलितों को दी गयी रेडियो का स्विच ऑफ हो चुका है. दूसरे शब्दों में कहें, तो रेडियो की तरंग का तराना अब इन महादलितों के लिए फसाना बन चुका है. अधिकतर महादलितों के घरों में मुख्यमंत्री की इस सौगात की आवाज अब नहीं गूंजती. बताया जाता है कि अधिकतर […]

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गोपालगंज : मुख्यमंत्री की ओर से महादलितों को दी गयी रेडियो का स्विच ऑफ हो चुका है. दूसरे शब्दों में कहें, तो रेडियो की तरंग का तराना अब इन महादलितों के लिए फसाना बन चुका है. अधिकतर महादलितों के घरों में मुख्यमंत्री की इस सौगात की आवाज अब नहीं गूंजती.
बताया जाता है कि अधिकतर रेडियो खराब होकर कबाड़ की चीज बन चुके हैं, तो कई ने रेडियो को बेच कर उसकी रकम को अपना निवाला बना लिया. विशुनपुर तटबंध पर बसे राजन, रमइया, सोहन, किशोर, गुलाब राम आदि के घरों में मुख्यमंत्री की रेडियो नहीं बजती. इनको रेडियो मिला ही नहीं. जबकि, सिपाया महादलित बस्ती में ज्ञानमती कहती है कि रेडियो तो मिला, लेकिन बैटरी का पैसा नहीं होने के कारण बेकार पड़ा हुआ है.
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री महादलित रेडियो योजना के तहत जिले में करीब 75 हजार 55 महादलितों के बीच रेडियो बांटा गया था. वितरण 24 अप्रैल से आठ मई, 2013 तक किया गया था. जिले का लक्ष्य 88 हजार 284 निर्धारित था. मगर कुछ पेचीदगी की वजह से लक्ष्य से कुछ कम वितरण हुआ. सरकार ने उत्तम क्वालिटी का ही रेडियो बंटवाने का फरमान जारी किया था. लिहाजा फिलिप्स व संतोष कंपनी का ही रेडियो का वितरण हुआ था.
फिलिप्स कंपनी का 40 हजार 394 तथा संतोष कंपनी का 34 हजार 661 रेडियो बांटा गया. वितरण के समय कुछ महादलितों ने रेडियो की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए हंगामा भी किया था. रेडियो के साथ बैटरी नहीं देने का भी मामला उठा था.
योजना का मकसद नहीं हुआ पूरा
सदर विधायक सुबास सिंह कहते हैं कि योजना का प्रचार-प्रसार नहीं होने से इसका मकसद पूरा नहीं हो सका. योजना के लाभ से कई महादलित वंचित रह गये. जिन्हें मिला, उन्हें भी इसके उद्देश्य की जानकारी नहीं दी गयी. दलित परिवार को बैटरी का अभाव तथा नकद पैसा कई जगह मिलने से रेडियो के महत्व को नहीं समझा गया.
कल्याण विभाग से गायब है रेडियो का फाइल : कल्याण विभाग के पास से जिले में बांटे गये रेडियो का पूरा रेकाॅर्ड गायब है. पिछले आठ दिनों से कल्याण विभाग में रेडियो की फाइलें खोजी जा रही है. रेडियो की फाइलें बाबुओं को नहीं मिल पा रही है. फाइलें नहीं मिलने से वास्तविक जानकारी विभाग के अधिकारियों को भी नहीं हो पा रही है.
कहते हैं अधिकारी
योजना के तहत करीब चार सौ रुपये मूल्य का रेडियो बैटरी के साथ दिया गया. वितरण शिविर के माध्यम से हुआ. योजना में वितरित रेडियो की जांच से संबंधित कोई दिशा निर्देश नहीं था.
कृष्ण कुमार सिन्हा, जिला कल्याण पदाधिकारी, गोपालगंज
प्रभात खबर को उपलब्ध आंकड़े
बैकुंठपुर 544
सिधवलिया 322
मांझा 251
बरौली 212
गोपालगंज 352
कुचायकोट 573
थावे 369
हथुआ 463
उचकागांव 426
फुलवरिया 345
भोरे 489
कटेया 361
विजयीपुर 493
पंचेदवरी 384
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