कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय का लेखा जोखा

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jan 2016 8:42 PM

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कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय का लेखा जोखाकिसानों की आय बढ़ाने के साथ उत्पादकता बेहतर करने की पहल इस वर्ष 5 करोड़ किसान और अगले साल बाकी बचे किसानों को यह कार्ड मुहैया करा दिया जायेगा. इसके लिए वर्ष 2014-15 और 2015-16 में केंद्र सरकार ने 79 व 101 मृदा परीक्षण लैब को मंजूरी दीवर्ष […]

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कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय का लेखा जोखाकिसानों की आय बढ़ाने के साथ उत्पादकता बेहतर करने की पहल इस वर्ष 5 करोड़ किसान और अगले साल बाकी बचे किसानों को यह कार्ड मुहैया करा दिया जायेगा. इसके लिए वर्ष 2014-15 और 2015-16 में केंद्र सरकार ने 79 व 101 मृदा परीक्षण लैब को मंजूरी दीवर्ष 2014-15 और 2015-16 में केंद्र सरकार ने 79 व 101 मृदा परीक्षण लैब को मंजूरी दी, जबकि इसके पहले के चार साल में सिर्फ 43 लैंब को मंजूरी दी गयी थीसॉयल हेल्थ मैनेजमेंट के तहत मौजूदा सरकार ने 288 करोड रुपये का आवंटन किया, जबकि पिछले चार साल में सिर्फ 72 करोड रुपये का आवंटन किया गया थानये अनुसंधान संस्थान के रूप में झारखंड के बरही में दिल्ली पूसा संस्थान की तर्ज पर नया कृषि अनुसंधान संस्थान और मोतीहारी में राष्ट्रीय समेकित कृषि अनुसंधान केंद्र खोला गयाब्यूरो, नयी दिल्ली खराब मॉनसून, बाढ़ और ओलावृष्टि के कारण किसानों के सामने गंभीर समस्या पैदा हो गयी है. आर्थिक विकास दर में कृषि क्षेत्र का योगदान लगातार कम होता जा रहा है. सूखे और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं. इसे देखते हुए केंद्रीय कृषि और कल्याण मंत्रालय ने उत्पादन बढ़ाने के साथ ही किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कई कदम उठाये हैं. केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने अपने मंत्रालय का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि मोदी सरकार किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ, जमीन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाया है. मंत्रालय ने उत्पादकता बढ़ाने के लिए 2014-15 में 14 करोड़ किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड देने का निर्णय लिया. इस वर्ष 5 करोड़ किसान और अगले साल बाकी बचे किसानों को यह कार्ड मुहैया करा दिया जायेगा. इसके लिए वर्ष 2014-15 और 2015-16 में केंद्र सरकार ने 79 व 101 मृदा परीक्षण लैब को मंजूरी दी, जबकि इसके पहले के चार साल में सिर्फ 43 लैब को मंजूरी दी गयी थी. यही नहीं सॉयल हेल्थ मैनेजमेंट के तहत मौजूदा सरकार ने 288 करोड रुपये का आवंटन किया, जबकि पिछले चार साल में सिर्फ 72 करोड रु पये का आवंटन किया गया था. सिंचाई सुविधा बेहतर करने की पहलप्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 5300 करोड़ का प्रावधान किया गया, ताकि सभी किसान के खेत को सिंचाई की सुविधा मिल सके. सिंचाई योजना तैयार करने के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया. 31 मार्च 2016 तक 100 जनपदों के जिला सिंचाई योजना तैयार करने का लक्ष्य है और अगले वित्तीय वर्ष में सभी जनपदों को इससे जोड़ दिया जायेगा. जल प्रबंधन के क्षेत्र में पिछले एक साल में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है. उपज का सही मूल्य दिलाने की कोशिश किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार 200 करोड रुपये की लागत से 2017 तक सामान्य इ-मार्केट प्लेटफार्म शुरू करते हुए राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना लागू की. 31 दिसंबर 2015 तक आठ राज्यों की 214 मंडियों के लिए 111.16 करोड का आवंटन किया गया. 2018 तक सभी मंडियों को इससे जोड़ दिया जायेगा. आपदा प्रभावित किसानों को राहतआपदा पीडित किसानों को राहत पहुंचाने के मापदंड में बदलाव करते हुएं मोदी सरकार ने किसानों के मुआवजे की राशि डेढ़ गुना बढायी. पहले जिन किसानों का 50 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद होता थी, उन्हें ही मुआवजा मिलता था लेकिन अब 30 फीसदी फसल नुकसान पर भी मुआवजा मिलने लगा. वर्षा से खराब हुए टूटे और कम गुणवत्ता वाले अनाज को पहले खरीदा नहीं जाता था या बेहद कम दाम मिलता था. लेकिन, मौजूदा सरकार ने ऐसे अनाजों को पूरा समर्थन मूल्य देने का ऐतिहासिक फैसला लिया.आय बढ़ाने के सार्थक नतीजेमधुमक्खी विकास के लिए 10 करोड रुपये आवंटित किये गये, जबकि पिछले चार साल में 4 करोड रुपये से कम का आवंटन किया गया था. शहद उत्पादन में पिछले पांच वर्षों के मुकाबले 18 महीने में औसतन 72000 टन से 81000 टन की वृद्धि हासिल की गयी. किसानों के लिए बैंकों से 8 लाख 50 हजार करोड़ का कर्ज दिया गया. किसानों की फसल सुरिक्षत रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज क्षमता बढाने के लिए कोल्ड चेन की शुरुआत करने का फैसला सरकार ने लिया.पशुधन, डेयरी एवं मछली पालन में वृद्धिकेंद्र सरकार ने दो नये राष्ट्रीय कामधेनु रीडिंग केंद्र की शुरुआत की. मत्स्य उत्पादन में तेज वृद्धि के लिए नीली क्रांति की शुरुआत की गयी. पिछले वर्ष मत्स्य उत्पादन 95.72 से बढकर 150 लाख टन हो गया. राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 2013-14 में 10.88 लाख पशुओं की बीमा करायी गयी थी, जबकि मोदी सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में यह संख्या 19 लाख हो गयी. पशुधन बीमा योजना 2013-14 में 300 जिलों में लागू थी, जिसे 2014-15 में 676 जिलों में लागू किया गया. दुग्ध किसानों की आमदनी 28.96 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 32.72 प्रति लीटर हो गयी और पिछले साल इसमें 16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी. कृषि शिक्षा का विस्तार राधा मोहन सिंह ने कहा कि पशु चिकित्सा के स्नात्तकोत्तर की शिक्षा के लिए डेढ़ गुना सीटों की संख्या बढ़ायी गयी. पशु चिकित्सा विद्यालय में भी डेढ़ गुना सीटें बढायी गयीं. पिछली सरकार के मुकाबले मोदी सरकार में कृषि शिक्षा के आवंटन में 40 प्रतिशत बढ़ी. इंफाल स्थित केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत नये कालेज खोले गये और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में कृषि कालेजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 13 हो गयी. दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए किसानों को बीज तथा तकनीकी सहायता प्रदान की गयी. नये अनुसंधान संस्थान के रूप में झारखंड के बरही में दिल्ली पूसा संस्थान की तर्ज पर नया कृषि अनुसंधान संस्थान और मोतिहारी में राष्ट्रीय समेकित कृषि अनुसंधान केंद्र खोला गया.

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