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तेजाब हमले के पीड़ितों को हर तरह की सहायता तुरंत

तेजाब हमले के पीड़ितों को हर तरह की सहायता तुरंत- गृह (विशेष) विभाग ने इसके पीड़ितों को हर तरह की सहायता मुहैया कराने के लिए तैयार की एसओपी- तेजाब हमले के पीड़ितों को एक महीने में एक लाख और तीन महीने में दो लाख दिया जायेगा मुआवजा- इसके पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने […]

तेजाब हमले के पीड़ितों को हर तरह की सहायता तुरंत- गृह (विशेष) विभाग ने इसके पीड़ितों को हर तरह की सहायता मुहैया कराने के लिए तैयार की एसओपी- तेजाब हमले के पीड़ितों को एक महीने में एक लाख और तीन महीने में दो लाख दिया जायेगा मुआवजा- इसके पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी होगी स्वास्थ्य विभाग की- 60 दिन के अंदर इससे संबंधित कांड का अनुसंधान करना होगा पूरा, 24 घंटे में प्रतिवेदन करना होगा दायरसंवाददाता, पटनाराज्य में तेजाब हमला के पीड़ितों की हर तरह से मदद करने के लिए पुलिस महकमे ने एक खास एसओपी (स्टैणर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) तैयार किया है. इसमें पीड़ितों को हर तरह की कानूनी सहायता, मुफ्त इलाज से लेकर आर्थिक सहायता निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया गया है. गृह (विशेष) विभाग ने इससे संबंधित संकल्प जारी कर दिया है. इसके तहत पुलिस और स्वास्थ्य महकमे के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेवारी तय कर दी गयी है. किसी तरह की लापरवाही की स्थिति में इन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी बनाया गया है. तेजाब पीड़ितों को हर तरह की सहायता मुहैया कराने से संबंधित तमाम नियम-कायदों पर राज्य कैबिनेट पहले ही मुहर लगा चुका है. बिहार में पहली बार तेजाब पीड़ितों के लिए इस तरह की कार्यप्रणाली तैयार की गयी है. इसकी प्रति सभी विभागों के प्रमुखों को जारी कर दिया गया है. एसओपी की खास बातें- तेजाब हमले की सूचना मिलने या कांड दर्ज होने के तीन दिन के अंदर संबंधित पुलिस अधीक्षक जिला विधिक सेवा प्राधिकार को पूरा विवरण के साथ भेजा जायेगा.- इसकी एक प्रति बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव और पुलिस महानिरीक्षक (कमजोर वर्ग) को भी भेजी जायेगी.- जिला प्राधिकार पीड़ित को अधिकतम तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया जायेगा. यह मुआवजा तीन महीने के अंदर हर हाल में देना होगा. इसमें एक महीने के अंदर एक लाख रुपये मिलेगा.- पीड़ित को मुफ्त चिकित्सा मुहैया कराना स्वास्थ्य विभाग का दायित्व होगा. अनुश्रवण के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक नोडल पदाधिकारी को चिन्हित किया जायेगा. इस अधिकारी का फोन नंबर, पता सार्वजनिक किया जायेगा.- इसका प्रतिवेदन संबंधित चिकित्सक 24 घंटे के अंदर पुलिस को मुहैया करायेंगे. इसमें किसी तरह की आना-कानी की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के नोडल पदाधिकारी से की जायेगी. – इस कांड में पीड़ित का 60 दिन के अंदर अनुसंधान प्रतिवेदन हर हाल में जमा करना होगा. पर्यवेक्षण टिप्पणी समर्पित करने में तीन दिन से अधिक समय नहीं लेना होगा.- पुलिस मुख्यालय में तेजाब हमले से संबंधित कांडों के अनुसंधान, पीड़ित की चिकित्सा, अनुदान भुगतान समेत अन्य के लिए आइजी (कमजोर वर्ग) के स्तर से किया जायेगा.

Prabhat Khabar Digital Desk
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