जान जोखिम में डाल पढ़ते हैं छात्र

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जान जोखिम में डाल पढ़ते हैं छात्र जर्जर भवन कभी भी वन सकता है हादसे का गवाह मरम्मत कार्य 1995 से है लटका फोटो नं-3संवाददाता, सासामुसाकुचायकोट प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवां विजयीपुर कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है. यहां जर्जर भवन में छात्र-छात्राएं पढ़ने को विवश हैं. इस विद्यालय में 650 […]

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जान जोखिम में डाल पढ़ते हैं छात्र जर्जर भवन कभी भी वन सकता है हादसे का गवाह मरम्मत कार्य 1995 से है लटका फोटो नं-3संवाददाता, सासामुसाकुचायकोट प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवां विजयीपुर कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है. यहां जर्जर भवन में छात्र-छात्राएं पढ़ने को विवश हैं. इस विद्यालय में 650 बच्चे हैं, जो छह कमरों में पढ़ते हैं. इन सभी कमरों की हालत जर्जर है. गौरतलब है कि इस विद्यालय में मरम्मत के लिए वर्ष 1995 में 2.50 लाख रुपये सुनिश्चित रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत स्वीकृत हुआ. मरम्मत के लिए विद्यालय की खिड़की निकाल दी गयी. उसके बाद विभाग और संवेदक के बीच उपजे विवाद के कारण मरम्मत कार्य रुक गया. दो दशक बाद विद्यालय के कमरे और खस्ताहाल हो गये हैं. प्रतिदिन भय के साये में छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. ग्रामीणों ने कई बार इसके लिए शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रतिनिधियों से गुहार लगायी, लेकिन स्थिति जस-की-तस है. ऐसे में बच्चों का भविष्य खतरे में है. एक नजर में विद्यालय छात्र-छात्राओं की संख्या- 650 शिक्षक – 12कमरे की संख्या – छह(जर्जर)किचेन शेड – 0विद्यालय में छह कमरे हैं, जिनकी स्थिति अत्यंत दयनीय है. जान जोखिम में डाल बच्चों को पढ़ाया जाता है. विभाग को लिखा गया है, लेकिन अभी तक भवन निर्माण संबंधी कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. बालदेव शर्मा, प्रधानाध्यापक

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