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कोर्ट गंभीर, रेकॉर्ड के साथ डॉक्टर तलब

गोपालगंज : सीजेएम विश्वविभूति गुप्ता के कोर्ट ने सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फर्जीवाड़े के मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने अस्पताल के अधीक्षक व दो डॉक्टरों को रेकॉर्ड के साथ तलब किया है. कोर्ट इस मामले में 22 जून को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट पंजी, वॉल्यूम […]

गोपालगंज : सीजेएम विश्वविभूति गुप्ता के कोर्ट ने सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फर्जीवाड़े के मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने अस्पताल के अधीक्षक व दो डॉक्टरों को रेकॉर्ड के साथ तलब किया है. कोर्ट इस मामले में 22 जून को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट पंजी, वॉल्यूम संख्या- 42 के पृष्ठ नं 626 तथा 649 की प्रमाणित कॉपी कोर्ट को उपलब्ध कराने को कहा है. कोर्ट के रुख से डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

इससे पहले भी सदर अस्पताल में सक्रिय माफियाओं के कारनामे उजागर हो चुके हैं. प्रभात खबर ने इस अस्पताल में सक्रिय माफिया द्वारा जख्म प्रतिवेदन से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक का सौदा करने की खबर प्रकाशित की थी.

मैनेज कर बदला गया था पोस्टमार्टम रिपोर्ट: गोपालपुर थाने के गोपालपुर गांव की रहने वाली मोबिना खातून ने सीजेएम विश्वविभूति गुप्ता के कोर्ट में अपील दाखिल कर आरोप लगाया था कि जमीन को लेकर विवाद में 15 अक्तूबर, 2017 को सुल्तान अहमद जो नशेड़ी किस्म के थे, वे बीमार हुए तो परिवार के लोग उन्हें गोरखपुर के सावित्री अस्पताल में भर्ती कराया. स्थिति बिगड़ने पर 19 अक्तूबर, 2017 को लखनऊ रेफर कर दिया गया. लखनऊ के गोयल अस्पताल में 23 अक्तूबर को 8.30 बजे उनकी मौत हो गयी. पोस्टमार्टम के पेज नं 626 पर बीमारी से मौत लिखा गया था. बाद में डॉक्टरों को मैनेज कर वॉल्यूम 42 के पृष्ठ 626 पर दर्ज पोस्टमार्टम रिपोर्ट को कटवा दिया गया और 649 पर नया पोस्टमार्टम रिपोर्ट दर्ज कराया गया, जिसमें डॉक्टरों के हस्ताक्षर 24 नवंबर, 2017 में दर्ज हैं. एक डॉक्टर जो पोस्टमार्टम में नहीं थे, वे रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किये. जबकि, एक डॉक्टर जो पोस्टमार्टम में थे, उन्होंने फर्जी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया. इस तरह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेर-बदल की गयी.
डॉक्टर के वेतन से 10 हजार जुर्माना काटने का आदेश
सीजेएम कोर्ट को जख्म प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने पर नाराज कोर्ट ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए डॉक्टर के वेतन से काटने का आदेश दिया है. नगर थाने के कांड संख्या 203/18 में आरोपितों ने जमानत के लिए कोर्ट के समक्ष अपील की थी. कोर्ट ने अस्पताल से जख्म प्रतिवेदन की मांग की. पुलिस को जख्म प्रतिवेदन नहीं मिलने पर कांड में सुनवाई बाधित होने लगी. इस बीच कांड के अनुसंधानकर्ता ने कोर्ट को लिखित बयान देकर कहा कि सदर अस्पताल के डॉक्टर आशीष कुमार द्वारा जख्म प्रतिवेदन बार-बार कहने के बाद भी नहीं दिया जा रहा है. इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने वेतन से 10 हजार रुपये का जुर्माना काटने का आदेश दिया है.
क्या कहते हैं सीएस
मेरी जानकारी में यह मामला नहीं था. कोर्ट के आदेश का पालन किया जायेगा. अगर फर्जीवाड़ा सही पाया गया तो दोषी जो भी होंगे उन्हें बख्शा नहीं जायेगा.
डॉ एके चौधरी, सिविल सर्जन, गोपालगंज

Prabhat Khabar Digital Desk
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