तिलक डूमर गांव में नहीं जले चूल्हे, सदमे में लोग

Published at :20 Mar 2018 4:38 AM (IST)
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तिलक डूमर गांव में नहीं जले चूल्हे, सदमे में लोग

भोरे : रविवार की शाम भोरे थाने के तिलक डूमर गांव में जो घटना हुई, सभी को स्तब्ध कर दिया. हर किसी के मुंह से एक ही बात निकल रही है कि एक मां अपने ही बच्चों के साथ ऐसा कैसे कर सकती है. घटना के बाद से ही तिलक डूमर गांव में चूल्हे नहीं […]

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भोरे : रविवार की शाम भोरे थाने के तिलक डूमर गांव में जो घटना हुई, सभी को स्तब्ध कर दिया. हर किसी के मुंह से एक ही बात निकल रही है कि एक मां अपने ही बच्चों के साथ ऐसा कैसे कर सकती है. घटना के बाद से ही तिलक डूमर गांव में चूल्हे नहीं जले हैं. महिलाओं के चीत्कार से पूरे गांव का माहौल गमगीन है. शारदानंद भगत के दरवाजे पर परिवार को ढाढ़स बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है. सभी उन्हीं बच्चों की चर्चा कर रहे हैं, जो अपनी धमा-चौकड़ी से पूरे गांव के लाडले बने हुए थे.

लेकिन, उन बच्चों की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि मां ने कर दी. बच्चों की मौत के बाद बिलख रही उसकी दादी तेतरी देवी और उसकी बड़ी मां कुसुमावती देवी बताती हैं कि बड़े अरमानों से बच्चों को पाला था. लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था. आज उनकी ही आंखों के सामने वे बच्चे दफना दिये जायेंगे. तीनों ने अलग-अलग समय में अपनी मां की कोख से जन्म लिया था, लेकिन मौत एक ही दिन हो गयी. घटना को लेकर पूरे गांव की महिलाएं रो रही हैं.

ममता के तीनों बच्चों को मौत रविवार की शाम आठ बजे तक हो गयी थी. तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए रोक कर पूरी रात रखा गया. सोमवार की दोपहर तक भी तीनों के पोस्टमार्टम का कार्य पूरा नहीं हो पाया था. इस कारण पोस्टमार्टम हाऊस के बाहर काफी इंतजार करना पड़ा. समाचार लिखे जाने तक बच्चों का शव तिलक डूमर गांव नहीं पहुंच सका था.
पुलिस अभिरक्षा में चल रहा ममता का इलाज
अपने बच्चों को जहर देने वाली आरोपित मां ममता को पुलिस ने रविवार की देर शाम ही गिरफ्तार कर लिया. दरअसल बच्चों को जहर देने के बाद उन्हें मरने के लिए ममता ने बच्चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया था. ग्रामीणों को जानकारी होने के बाद घर का दरवाजा तोड़ कर बच्चों को बाहर निकाला गया. इस दौरान ममता देवी वहां से भागने लगी.
लेकिन, ग्रामीणों ने पकड़ कर उसे एक पेड़ से बांध दिया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. ममता ने बताया था कि उसने तीन दिनों से कुछ खाया-पिया नहीं है. उसकी हालत बिगड़ने के बाद पुलिस अभिरक्षा में उसका इलाज भोरे रेफरल अस्पताल में चल रहा है. ममता को भी इस बात की जानकारी हो गयी है कि उसके तीनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं. फिलहाल डॉक्टरों की टीम हर घंटे उसके स्वास्थ्य की जांच कर रही है. इस मामले में सोमवार को भी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है.
नहीं मिला एंबुलेंस, तो बच्चों को बाइक से ले गये अस्पताल
तीनों बच्चों को जब गंभीर स्थिति में भोरे रेफरल अस्पताल लाया गया तो वहां एंबुलेंस मौजूद नहीं था. डॉक्टरों ने जब बच्चों को रेफर किया तो एक की मौत हो चुकी थी. दो बच्चे गंभीर हालत में थे. उन्हें बाइक से ही सदर अस्पताल गोपालगंज ले जाया गया. बच्चों के जाने के बाद एंबुलेंस को पीछे से भेजा गया, लेकिन बच्चों से एंबुलेंस की मुलाकात नहीं हो सकी. बताया जा रहा है कि घटना के वक्त एंबुलेंस कोरेयां में था, जहां चल रहे फुटबॉल टूर्नामेंट में ड्यूटी थी. बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना वैकल्पिक व्यवस्था के ही एंबुलेंस की ड्यूटी कोरेयां में दी गयी.
अगर सही समय से
एंबुलेंस और डॉक्टर साथ गये होते तो दो बच्चों की जिंदगी बच सकती थी. लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
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