लंगटू महारानी मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

मांझा : माता कब किस रूप में अपने भक्तों को दर्शन दे सकती हैं यह कोई नहीं जानता है. बात आज से करीब 500 वर्ष पूर्व की है. मांझा प्रखंड के लंगटूहाता गांव में नदी बहती थी. नदी के किनारे एक घनघोर जंगल था. इस जंगल के किनारे से गुजरनेवाले रास्ते से लोग आया -जाया […]
मांझा : माता कब किस रूप में अपने भक्तों को दर्शन दे सकती हैं यह कोई नहीं जानता है. बात आज से करीब 500 वर्ष पूर्व की है. मांझा प्रखंड के लंगटूहाता गांव में नदी बहती थी. नदी के किनारे एक घनघोर जंगल था. इस जंगल के किनारे से गुजरनेवाले रास्ते से लोग आया -जाया करते थे. एक दिन उसी जंगल में एक लड़की के कराहने की आवाज सुनाई दी, तभी लोग लड़की को ढूंढ़ने के लिए जंगल में निकल पड़े. जंगल में लोगों ने देखा कि 10 साल की लड़की नंगे चिल्ला रही है.
लोगों के द्वारा लड़की को जब वस्त्र दिया गया, तो वह एकाएक विलुप्त हो गयी तथा जंगल में आग लग गयी और देखते-ही-देखते आग ने पूरे जंगल में पकड़ लिया. लोग इस घटना को देख कर भौचक हो गये. जब ग्रामीण इस घटना के बाद वापस लौटे और पंडितों से यह कहानी सुनायी, तो पंडितों ने ग्रामीणों को बताया कि यह देवी कामाख्या की लीला थी और इस गांव की भलाई के लिए जिस स्थान से मां कामाख्या लुप्त हुई हैं, उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण होना चाहिए तथा नियमित पूजा-पाठ होना चाहिए. उसी समय ग्रामीणों की सहायता से एक मंदिर का निर्माण कराया गया. उस मंदिर में मां कामाख्या की प्रतिमा स्थापित की गयी.
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