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मरीज की सूचना समय से देने के बाद भी अस्पताल नहीं आती पुलिस

Updated at : 09 Jun 2025 5:56 PM (IST)
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मरीज की सूचना समय से देने के बाद भी अस्पताल नहीं आती पुलिस

112 पुलिस वाहन से लाकर महिला को एएनएमएमसीएच में रविवार को कराया था भर्ती

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अनदेखी… पुलिस प्रशासन एएनएमएमसीएच का नहीं कर रहा सहयोग

112 पुलिस वाहन से लाकर महिला को एएनएमएमसीएच में रविवार को कराया था भर्ती

मारपीट को लेकर पहले आर्थो में भर्ती, फिर अधीक्षक ने गयनी में कराया रेफर

दो दिन थाने में सूचना देने के बाद भी नहीं पहुंची पुलिस, कई बार-बार किया गया फोन

वरीय संवाददाता, गया जी़

पुलिस के 112 नंबर वाहन से मरीज, मारपीट व अन्य कई तरह से पीड़ित लोगों को लाभ मिल रहा है. इन दिनों किसी जगह घायल व्यक्ति दिखता है, तो 112 की टीम उसे अस्पताल लाकर भर्ती करा देती है. लेकिन, इसके बाद स्थानीय थाना अस्पताल का सहयोग नहीं करता है. सीमा क्षेत्र में उलझा कर हर बार मरीज की सुविधाओं के लिए थाने की पुलिस समय पर नहीं पहुंचती है, जबकि तुरंत ही अस्पताल में मरीज के भर्ती होने पर स्थानीय थाने को अस्पताल की ओर से सूचना दे दी जाती है. शनिवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे डायल 112 पुलिस वाहन वजीरगंज से एक 32 वर्षीय घायल महिला को एएनएमएमसीएच लेकर पहुंचा़ यहां 112 की टीम महिला को आर्थो में भर्ती कराकर चली गयी. प्राथमिक इलाज के बाद महिला को अधीक्षक ने पहल कर जांच के लिए गायनी वार्ड भेज दिया. यहां पर जांच के लिए महिला का स्वाब सैंपल लिया गया. महिला के वजीरगंज क्षेत्र से आने के चलते मेडिकल थाना की पुलिस के साथ वजीरगंज थाना को सूचना दी गयी. जांच के समय पुलिस प्रशासन का रहना जरूरी होता है.

मेडिकल थाना की पुलिस ने कहा दिया कि स्वाब जांच कराने के लिए वजीरगंज थाना की पुलिस आयेगी. वजीरगंज थाना में फोन किया गया, तो कई बार फोन काट दिया. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, अंत में सोमवार को वजीरगंज थाना की पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारी को मंगवार तक स्वाब जांच के लिए आने की बात बतायी.

हर बार आती है दिक्कत

मारपीट या अन्य तरह की दुर्घटना से संबंधित मरीज की सूचना किसी भी थाने को देने पर काफी आनाकानी की जाती है. इसका खामियाजा यह होता है कि कर्मचारी को स्थानीय थाने में कई बार एक ही मरीज की सूचना देने के लिए रजिस्टर लेकर जाना पड़ता है. अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि वजीरगंज में फोन करने पर जवाब भी ढंग से नहीं दिया गया. कई बार मगध मेडिकल अस्पताल का नाम सुनते ही फोन काट दिया गया. यह वाकया उनके लिए कोई नया नहीं है.

क्या कहते हैं अधीक्षक

महिला के बारे में अस्पताल से सूचना मिलने और परिजन की ओर से रेप की आशंका की बात सामने आने पर तुरंत ही पीड़िता को गायनी भेज दिया गया. वहां से स्वाब लेकर पुलिस को सूचना देने का निर्देश दिया गया. इस तरह के मामलों में अस्पताल में बहुत ही सतर्कता बरती जाती है. ऐसे हर विभाग को इसमें तत्परता दिखानी चाहिए.

डॉ केके सिन्हा, अधीक्षक, एएनएमएमसीएच B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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