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पितृपक्ष मेला में विदेशी तीर्थयात्री भी पहुंच रहे गया, पितरों का कर रहे पिंडदान

Updated at : 21 Sep 2024 10:15 AM (IST)
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gaya news | Pitru Paksha 2024: Foreign pilgrims are also arriving in the Pitru Paksha fair, offering Pind Daan to their ancestors.

पिंडदान करते विदेशी तीर्थयात्री

Pitru Paksha 2024: गयाजी की सड़कें इन दिनों तीर्थयात्रियों से भरी पड़ी हैं. जिधर जाइए उधर ही भीड़ नजर आ रहा है. देश के कोने-कोने से तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं. सिर्फ देश हीं नहीं विदेशी तीर्थयात्री भी गयाजी में भारी संख्या में अपने पितरों का पिंडदान करते नजर आए हैं.

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Pitru Paksha 2024: गयाजी की सड़कें इन दिनों तीर्थयात्रियों से भरी पड़ी हैं. जिधर जाइए उधर ही भीड़ नजर आ रहा है. देश के कोने-कोने से अलग-अलग वेश-भूषा, भाषा, खान-पान व जीवनशैली वाले तीर्थयात्री एक साथ बैठ कर अपने पूर्वजों का उद्धार करने के उद्देश्य से पिंडदान करने गया पहुंच रहे हैं. इतना ही नहीं पड़ोसी देश नेपाल व भूटान से भी काफी संख्या में पिंडदानी पहुंचे हैं, जो समूह में अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करते देखे गए.

भारत जिसे विविधताओं का देश कहा जाता है, उसका जीवंत उदाहरण गया जी में इन दिनों पितृपक्ष मेला महासंगम में देखने को मिल रहा है. पितृपक्ष मेला के चौथे दिन तक करीब 1.90 लाख तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं. देव घाट से संगत घाट के बीच भीड़ में अचानक से बड़ी संख्या में एक जगह बैठे तीर्थयात्री देख कर पांव ठहर गये. पूछने पर पिंडदानियों ने बताया वे नेपाल से आये हैं. नेपाल के मोहतार जिलांतर्गत गौशाला के वे रहनेवाले थे, जिनकी संख्या 45 थी.

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भूटान से 60 की संख्या में पहुंचे हैं तीर्थ यात्री

उन्हीं के पास थोड़ी दूर पर भूटान के चामची के रहनेवाले तीर्थयात्री भी बैठ कर पिंडदान करते देखे गये. उन्होंने बताया 60 की संख्या में वे यहां पहुंचे हैं. भूटान के चामची से आये प्रवीण ने बताया कि पांच दिनी श्राद्ध के लिए वे गयाजी पधारे हैं. उन्होंने इतनी भीड़ में भी व्यवस्था अच्छी बतायी. हां सिर्फ इतना अंतर है कि उनके यहां इतनी गर्मी नहीं है, जितनी यहां महसूस हो रही है. दोनों जगहों के तीर्थयात्री अपने पितरों का श्राद्ध कर अपने धन्य मान रहे हैं.

विदेशी तीर्थयात्रियों ने कहा यहां सुकून महसूस कर रहे हैं

उनका कहना है कि बड़ा सुकून महसूस कर रहा हूं. उन्होंने कहा अपने माता-पिता समेत सभी पितरों का उद्धार हर किसी को करना चाहिए. इससे आनेवाली पीढ़ी को सीख मिलती है. उन्होंने कहा गयाजी बड़ी पावन धरती है. यहां के बारे में सुन कर व सोशल मीडिया पर पढ़, सुन कर हमारी भी इच्छा हुई कि अपने पूर्वजों का उद्धार कर आऊं.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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