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जिले में 25 नवंबर से नाइट ब्लड सर्वे

Updated at : 20 Nov 2025 5:07 PM (IST)
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जिले में 25 नवंबर से नाइट ब्लड सर्वे

माइक्रो फाइलेरिया परजीवी रात में होता है सबसे अधिक सक्रिय

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माइक्रो फाइलेरिया परजीवी रात में होता है सबसे अधिक सक्रिय

वरीय संवाददाता, गया जी. जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 25 नवंबर से नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया जायेगा. जिले के 24 प्रखंडों में स्थित सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में नाइट ब्लड सर्वे किया जायेगा. शहर के सात शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में भी नाइट ब्लड सर्वे के तहत ब्लड के सैंपल लिये जायेंगे. इसको लेकर गुरुवार को जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग, जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लैब तकनीशियन के लिए प्रशिक्षण शिविर लगा. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ एमइ हक ने प्रतिभागियों को रक्त सैंपल लेने के तरीकों तथा उसे सुरक्षित रखने संबंधी तकनीकी जानकारी दी. मौके पर माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ संजय नाथ, सहायक प्रोफेसर डॉ रमेश प्रसाद, पैथोलॉजिस्ट डॉ राजेश कुमार, आर्मी हॉस्पिटल तथा सीआरपीएफ के लैब तकनीशियन, फाइलेरिया विभाग से अजय कुमार, पंकज कुमार, शिवनारायण वर्मा समेत सभी सीएचसी पीएचसी के लैब तकनीशियन मौजूद रहे. डॉ हक ने बताया कि सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों समेत संबंधित स्वास्थ्य कर्मचारियों से नाइट ब्लड सर्वे के लिए किट के उठाव के लिए कहा गया है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग को अब प्रभावती अस्पताल परिसर में शिफ्ट किया गया है. बताया कि शेरघाटी, आमस, परैया, इमामगंज, फतेहपुर, गुरारू, बेलागंज, मोहरा, गुरुआ, खिजरसराय, बाराचट्टी, डोभी, बांकेबाजार, मोहनपुर, टनकुप्पा, डुमरिया समेत आंबेडकर नगर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रामसागर, कटारी हिल, घुघरीटांड, डेल्हा व भुसंडा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में नाइट ब्लड सर्वे किया जाना है.

रात के समय अधिक सक्रिय होता है परजीवी

डॉ हक ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे में रक्त सैंपल लिये जाते हैं. इन सैंपलों की राज्य स्तरीय लैब में जांच की जाती है. इससे माइक्रो फाइलेरिया परजीवी से ग्रसित लोगों की पहचान की जाती है. रात में माइक्रो फाइलेरिया परजीवी अधिक सक्रिय होते हैं. इसलिए रात में ही रक्त के नमूने लिये जाते हैं. इसके बाद सर्वजन दवा सेवन अभियान संचालित किया जायेगा. 20 साल से अधिक उम्र के युवाओं को रक्त की जांच अवश्य करानी चाहिए. फाइलेरिया के कारण हाथी पांव या अंडकोश में सूजन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. साथ ही जनन अंगों में फाइलेरिया होने का खतरा रहता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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