गया जी बोरवेल हादसा: 15 में 10 बोरवेल में नहीं मिला पानी, पीयूष के रेस्क्यू के बाद खुले गड्ढों को भरने का आरोप

बोरबेल से पीयूष के निकलने के बाद खुशी में झुमते एनडीआरएफ की टीम
Gaya ji Borewell Accident : गया जी में तीन साल के बच्चे के बोरवेल में गिरने की घटना ने नल-जल योजना के तहत कराए गए कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पानी न मिलने वाले कई बोरवेल को सुरक्षित बंद नहीं किया गया, जिससे हादसे की आशंका बनी रही.
Gaya ji Borewell Accident : गया जी जिले के फतेहपुर प्रखंड में तीन वर्षीय पीयूष मांझी के बोरवेल में गिरने की घटना के बाद नल-जल योजना के तहत कराए गए बोरवेलों को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई अनुपयोगी बोरवेल को नियमानुसार बंद नहीं किया गया, जिससे हादसे की आशंका बनी रही.
नल-जल योजना के बोरवेल पर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार कठौतिया केवाल पंचायत में पीएचईडी विभाग की ओर से नल-जल योजना के तहत 15 स्थानों पर बोरिंग कराई गई थी. इनमें केवल पांच स्थानों पर ही भूजल मिला, जबकि 10 स्थानों पर पानी नहीं निकला. ग्रामीणों का आरोप है कि जिन बोरवेलों में पानी नहीं मिला, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार भरकर सुरक्षित बंद नहीं किया गया.
जिस गांव में हादसा हुआ, वहां चार बोरवेल थे अनुपयोगी
ग्रामीणों ने बताया कि जिस गांव में तीन वर्षीय पीयूष मांझी बोरवेल में गिरा, वहां नल-जल योजना के तहत पांच स्थानों पर बोरिंग कराई गई थी. इनमें केवल एक स्थान पर पानी मिला, जबकि चार बोरवेल अनुपयोगी हो गए. आरोप है कि संबंधित संवेदक ने इन बोरवेलों को सुरक्षित तरीके से बंद नहीं कराया और उन्हें खुले हाल में छोड़ दिया.
हादसे के बाद रातों-रात बोरवेल बंद करने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि पीयूष के हादसे के बाद कार्रवाई की आशंका से संवेदक सक्रिय हुआ और रातों-रात तीन खुले बोरवेलों को सीमेंट, पत्थर और अन्य सामग्री डालकर ढंक दिया गया. ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है.
पीयूष रेस्क्यू अभियान का घटनाक्रम
- 6:28 बजे पीयूष मांझी बोरवेल में गिरा.
- 6:30 बजे ग्रामीण मौके पर पहुंचे.
- 7:25 बजे बीडीओ शशि भूषण साहू, सीओ अमिता सिन्हा और गुरपा थाना प्रभारी शिवनंदन कुमार मौके पर पहुंचे. 7:35 बजे जेसीबी से खुदाई शुरू की गई.
- 7:45 बजे एंबुलेंस और नर्स के साथ मेडिकल टीम पहुंची.
- 9:05 बजे वजीरगंज कैंप डीएसपी सुनील कुमार पांडे के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम पहुंची.
- 10:30 बजे ऑक्सीजन सिलेंडर खाली होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने हंगामा किया.
- 11:10 बजे सीएचसी फतेहपुर से चिकित्सक मौके पर पहुंचे.
- 11:30 बजे आपदा विभाग के एडीएम कुमार पंकज घटनास्थल पहुंचे.
- 11:45 बजे एसडीआरएफ टीम ने रेस्क्यू में असमर्थता जताई.
- 12:05 बजे पटना के बिहटा से एनडीआरएफ की टीम पहुंची.
- 12:10 बजे एनडीआरएफ ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया.
- 1:50 बजे एनडीआरएफ ने पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
- 1:52 बजे मौके पर बच्चे की स्वास्थ्य जांच की गई.
- 1:56 बजे मेडिकल टीम की निगरानी में पीयूष को उसकी मां और चाचा के साथ फतेहपुर सीएचसी के लिए रवाना किया गया. ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
ग्रामीणों की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने मांग की है कि नल-जल योजना के तहत कराए गए सभी बोरवेलों की जांच कराई जाए. उनका कहना है कि यदि अनुपयोगी बोरवेलों को समय पर सुरक्षित बंद किया गया होता, तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी.
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