Bihar Flood News: फल्गु नदी में देर रात एक बजे आया तेज बहाव, बंजारा परिवार के बाप-बेटे लापता

Edited by Paritosh Shahi
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Bihar Flood News: गया में फल्गु नदी में शनिवार देर रात अचानक तेज बहाव आने से सिक्स लेन पुल के नीचे रह रहे गुलगुलिया बंजारा परिवारों में अफरा-तफरी मच गई. तेज बहाव में एक बच्चा और उसका पिता बह गए, जबकि 18 लोगों को स्थानीय मदद से सुरक्षित निकाला गया.

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Bihar Flood News: फल्गु नदी में शनिवार की देर रात करीब एक बजे अचानक तेज बहाव के साथ पानी आ गया, इस दौरान गया जी शहर के पास स्थित मानपुर इलाके में सिक्स लेन पुल के नीचे झुग्गी-झोंपड़ी डालकर रह रहे दो दर्जन से अधिक गुलगुलिया बंजारा परिवारों में अफरा-तफरी मच गयी. पिछले एक सप्ताह से नदी के बीच डेरा जमाये ये परिवार तेज बहाव में फंस गये. घटना के दौरान चीख-पुकार सुनकर आसपास के स्थानीय लोग तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया. इस बीच एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंच गयी. तेज बहाव में एक परिवार के तीन सदस्य पति, पत्नी और डेढ़ वर्षीय बच्चा बह गये.

लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही SDRF

एसडीआरएफ की तत्परता से महिला को जीवित निकाल लिया गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बतायी गयी है, लेकिन उसका पति, 40 वर्षीय जितेंद्र राठौर और डेढ़ साल का बेटा नीरज अब तक लापता हैं. एसडीआरएफ की टीम तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है. यह परिवार चाकंद थाना क्षेत्र के मीराबीघा में अस्थायी रूप से रहता है.

मच गयी चीख-पुकार

फल्गु नदी में शनिवार की देर रात करीब एक बजे अचानक तेज बहाव के साथ पानी आने के बाद सिक्स लेन पुल के नीचे झुग्गी-झोंपड़ी डालकर रह रहे दो दर्जन से अधिक गुलगुलिया बंजारा परिवारों में अफरा-तफरी मच गयी. पिछले एक सप्ताह से नदी के बीच डेरा जमाये ये परिवार तेज बहाव में फंस गये. घटना के दौरान चीख-पुकार सुनकर आसपास के स्थानीय लोग तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया.

इस बीच एक डेढ़ साल का बच्चा व उसका पिता दोनों बह गये. घटना में बंजारा परिवारों के एक दर्जन से अधिक मवेशी भैंस, बकरी, मुर्गी, कुत्ते आदि भी तेज बहाव में बह गये. इनके साथ-साथ उनके खाने-पीने और दैनिक उपयोग की सारी चीजें भी नष्ट हो गयीं. बंजारा टोली के सदस्य सुरेश राठौर ने बताया कि करीब 20 परिवार पुल के नीचे टेंट डालकर रह रहे थे. रात के समय अचानक पानी का स्तर बढ़ा, जिससे सभी लोग फंस गये.

स्थानीय लोग बने मददगार

स्थानीय निवासी संतोष कुमार ने बताया कि रात में चीख-पुकार सुनकर अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और रस्सी के सहारे राहत कार्य शुरू किया. रस्सी से बांधकर कई महिलाओं, बच्चों और मवेशियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. एक बंजारा युवक ने अपने दो वर्षीय बच्चे को गमछे से कमर में बांधकर रस्सी के सहारे पुल से खिंचवा कर दोनों की जान बचायी. इस दौरान करीब 18 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन कुछ लोग और मवेशी नहीं बच सके.

प्रशासन ने समय रहते सतर्कता क्यों नहीं बरती?

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि लगातार हो रही बारिश और बाढ़ की स्थिति के बावजूद जिला प्रशासन ने नदी किनारे या नदी के बीच झुग्गियों में रह रहे लोगों को हटाने की कोई पहल क्यों नहीं की. यदि समय रहते चेतावनी दी जाती या निगरानी होती तो यह हादसा टल सकता था.

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क्या बोले थानाध्यक्ष और अंचलाधिकारी

अपर थानाध्यक्ष शशि भूषण प्रसाद ने बताया कि स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस व एसडीआरएफ मौके पर पहुंची और 18 लोगों को रेस्क्यू किया गया. हालांकि, जितेंद्र राठौर और उसका पुत्र लापता हैं. उनकी तलाश जारी है और नीता देवी की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

अंचलाधिकारी सुबोध कुमार ने बताया कि बंजारा परिवारों के पास कोई वैध दस्तावेज जैसे आधार कार्ड या वोटर आइडी नहीं है, जिससे उनकी पहचान पक्की हो सके. फिलहाल, जिला प्रशासन के निर्देशानुसार उन्हें राहत सामग्री जैसे अनाज व प्लास्टिक शीट दी जा रही है. मवेशियों के नुकसान पर भी उचित मुआवजे की व्यवस्था की जायेगी.

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मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित

घुमंतू बंजारा समुदाय आज भी मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित है. न उनका स्थायी निवास है, न कोई पहचान दस्तावेज. यही कारण है कि वे सरकारी योजनाओं और मतदान की प्रक्रिया से भी बाहर हैं. बंजारा परिवार समूह में रहते हैं और पूरे सामान के साथ एक जगह से दूसरी जगह डेरा डालते हैं. पढ़ाई-लिखाई की कोई व्यवस्था नहीं होती और महिलाएं भीख मांगकर, गाकर अथवा वस्तुएं बेचकर जीवन यापन करती हैं.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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