सात महीने तक चला था इंटर की परीक्षा देने का दौर

गया: जिला शिक्षा कार्यालय में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) के पद पर पोस्टेड प्रियनंदन 1979 में किसान कॉलेज सोहसराय (बिहारशरीफ) से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. लेकिन, इंटर की परीक्षा पास करने में उन्हें सात महीनों तक चार परीक्षा केंद्रों का चक्कर काटना पड़ा. दशकों पुरानी अपनी याद को ताजा करते हुए डीपीओ ने बताया […]
जुलाई 1979 में इंटर की परीक्षा की घोषणा हुई. परीक्षा केंद्र बिहारशरीफ स्थित नालंदा कॉलेज बना. परीक्षा केंद्र पर कदाचार होने की शिकायत पर परीक्षा रद्द कर दिया गया. दो महीने बाद पटना स्थित ओरियेंटल कॉलेज में परीक्षा शुरू हुई. दो-तीन विषय की ही परीक्षा हुई कि फिर कदाचार के आरोप में परीक्षा रद्द कर दिया गया.
इसके दो महीने के बाद परीक्षा केंद्र सासाराम स्थित श्रीशंकर कॉलेज में बनाया गया. वहां पहले दिन परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन दूसरे ही दिन असामाजिक तत्वों ने परीक्षा केंद्र के अंदर बमबारी कर दी. इस घटना के बाद फिर परीक्षा को रद्द कर दिया गया. जनवरी-फरवरी 1980 में परीक्षा केंद्र आरा स्थित जैन कॉलेज में बना. तब वहां काफी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा हुई. कदाचारमुक्त माहौल में परीक्षा होने के कारण उनके कॉलेज के करीब 300 स्टूडेंट्स में से 70 परीक्षार्थी ही उतीर्ण हो सके. डीपीओ ने बताया कि अप्रैल 1980 में रिजल्ट आया, तो उसमें वह अपने कॉलेज में 589 अंक लाकर टॉप कर गये थे. लगातार परीक्षा केंद्र रद्द हो जाने व परीक्षा देने को लेकर ही सात महीने तक उसमें उलझे रहने के कारण मन थोड़ा उदास हो गया था. लेकिन, जब अपने कॉलेज में टॉप होने की बात सुनी तो सारी उदासी दूर हो गयी.
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