यहां तय होती है कीमत, बिकते हैं मरीज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Feb 2017 6:51 AM (IST)
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रैकेट. मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रेफर होने के बाद एंबुलेंसवाले करते हैं ‘खेल’ गया : मेडिकल काॅलेज अस्पताल से रेफर होनेवाला लगभग हर मरीज बिक जाता है. इन मरीजों के खरीदार होते हैं पटना बाइपास पर बने कई प्राइवेट अस्पताल. पीएमसीएच जाने की जगह इन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में पहुंचा दिया जाता है. […]
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रैकेट. मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रेफर होने के बाद एंबुलेंसवाले करते हैं ‘खेल’
गया : मेडिकल काॅलेज अस्पताल से रेफर होनेवाला लगभग हर मरीज बिक जाता है. इन मरीजों के खरीदार होते हैं पटना बाइपास पर बने कई प्राइवेट अस्पताल. पीएमसीएच जाने की जगह इन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में पहुंचा दिया जाता है. इसके बदले में पहुंचानेवाले को एक कीमत मिलती है. यह कीमत क्या होगी, यह मरीज की बीमारी से तय होती है. दुर्घटनावाले मरीजों की ज्यादा कीमत अदा की जाती है. यह पूरा खेल मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल से शुरू होकर पटना तक पहुंचने के रास्ते में चलता है. पहले तो यह कहा जाता था कि इस खेल में प्राइवेट एंबुलेंसचालकों की संलिप्तता होती है, लेकिन अब ऐसे भी मामले आ रहे हैं, जिनमें सरकारी एंबुलेंस के कर्मचारियों के भी नाम सामने आ रहे हैं.
पीएमसीएच की जगह पहुंचाया प्राइवेट अस्पताल: मंगलवार को मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आया. मेडिकल थाने के नीमा गांव के दिलीप यादव ने राज्य स्वास्थ्य समिति में शिकायत दर्ज करायी है. उन्होंने कहा है कि 18 फरवरी को उनकी पत्नी जल गयी थी. मगध मेडिकल में भरती कराने के बाद उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. चिकित्सकों के मुताबिक, वह 90% जली हुई थी. दिलीप ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह अपनी पत्नी को लेकर मगध मेडिकल से मिले सरकारी एंबुलेंस से पीएमसीएच जा रहा था. लेकिन, रास्ते में ही एंबुलेंसचालक व एक कर्मचारी ने उसे बहला-फुसला कर पटना बाइपास के पास एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचा दिया. दिलीप की पत्नी वहां भरती है. अस्पताल का बिल एक लाख से अधिक हो गया है. ऐसी स्थिति में उसने राज्य स्वास्थ्य समिति को पत्र लिखा है.
एक मरीज के परिजन की शिकायत पर मामले की जांच शुरू
अधीक्षक ने जारी किया नोटिस, जांच के आदेश
इधर, राज्य स्वास्थ्य समिति ने इस मामले में मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल के अधीक्षक डाॅ सुधीर कुमार सिन्हा को पत्र भेजा है. अधीक्षक ने 18 फरवरी की मरीजों की सूची जांचने का आदेश दिया. इसके बाद उन कर्मचारियों के नाम सामने आ गये, जो उस दिन सरकारी एंबुलेंस लेकर पीएमसीएच के लिए रवाना हुए थे. उनके नाम मिथिलेश व भारती हैं. अधीक्षक ने इन दोनों के खिलाफ नोटिस जारी कर जांच के आदेश दिये हैं. इसके साथ ही उस डॉक्टर को भी नोटिस जारी किया गया है, जिसके हस्ताक्षर से मरीज को रेफर किया गया था. अधीक्षक ने कहा कि मरीज के परिजनों को लेकर जो कर्मचारी पीएमसीएच गये थे. उन्हें नोटिस दिया गया है. इस पूरे प्रकरण पर वरीय अधिकारियों के साथ बैठक होगी.
‘ऊपरी पहुंच’ की धौंस पर होता है काम
सरकारी कर्मचारी यह पूरा खेल ‘ऊपर’ तक बता कर करते हैं. सूत्रों की मानें, तो इस घटना में जिस सरकारी एंबुलेंस कर्मचारी का नाम आ रहा है, उसके खिलाफ पहले भी शिकायत आ चुकी है. यह कर्मचारी इससे पहले भी यहां से रेफर होनेवाले मरीज को लेकर पीएमसीएच की जगह पटना बाइपास के प्राइवेट अस्पताल पहुंचा था. सूत्र बताते हैं कि इससे पहले के मामले में अधीक्षक ने उक्त कर्मचारी पर कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया था, तो उसने जिले के ही एक विधायक (जो सत्ता पक्ष के हैं) से अधीक्षक के पास फोन करवाया. विधायक द्वारा कहा गया कि कर्मचारी दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा. इस बार माफ कर दिया जाये. पता चला है कि इस घटना के बाद से ही कर्मचारी पूरे अस्पताल में खुद को विधायक का चहेता बता कर बेखौफ गलत काम कर रहा है.
पटना ले जाने के दौरान रास्ते में ही हो जाती है ‘सेटिंग’
सरकारी एंबुलेंसकर्मी के खिलाफ आयी शिकायत
पटना में बाइपास पर बने कई प्राइवेट अस्पताल में कराते हैं भरती
एवज में अस्पताल से मिलता है मोटा कमीशन
राजनेता और दबंगो का संरक्षण
मगध मेडिकल काॅलेज के ही कर्मचारियों ने बताया कि पटना बाइपास पर बने लगभग सभी अस्पतालों को राजनेताओं या दंबगों का संरक्षण है. ऐसे में यहां भरती होनेवाले मरीज के परिजनों की एक नहीं चलती. शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है. सूत्रों की ही मानें, तो मगध मेडिकल काॅलेज के भी कई चिकित्सक इन अस्पतालों के संपर्क में होते हैं. गंभीर स्थितिवाले मरीजों को इन चिकित्सकों के ही निर्देश पर उन प्राइवेट अस्पतालों में ले जाया जाता है.
कैसे होती है सेटिंग
मगध मेडिकल के इमरजेंसी वार्ड में कोई गंभीर स्थिति में मरीज आता है. यहां पहले से ही सक्रिय एजेंट कुछ कर्मचारियों की मदद से मरीज के परिजनों को बहलाना-फुसलाना शुरू कर देते हैं. इस दौरान ही एक और सेटिंग होती है और मरीज को पीएमसीएच के लिए रेफर कर दिया जाता है. यहां से परिजन एंबुलेंस में अपने मरीज को लेकर निकलते हैं. रास्ते में एंबुलेंस ड्राइवर व उसके साथ मौजूद दूसरे स्टाफ मरीज के परिजनों को यह विश्वास दिला देते हैं कि पीएमसीएच में इंतजाम बेहतर नहीं है. मरीज की जान नहीं बच सकेगी. इसके बाद मरीज को प्राइवेट अस्पताल में पहुंचा दिया जाता है. यहां पहुंचने के बाद एंबुलेंसवाले को उसके हिस्से का पैसा मिल जाता है.
शुरू कर दी गयी है जांच
एक मरीज के परिजन दिलीप यादव ने राज्य स्वास्थ्य समिति में शिकायत की है. वहां से एक पत्र आया है. उस दिन एंबुलेंस की ड्यूटी में जो कर्मचारी थे, उनके नाम पता कर लिये गये हैं. दोनों को नोटिस जारी कर दिया गया है. इस मामले में जांच शुरू कर दी गयी है.
डाॅ सुधीर कुमार सिन्हा, अधीक्षक, मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल
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