संस्कार व संस्कृति की जननी है संस्कृत

Updated at :20 Jan 2017 8:26 AM
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संस्कार व संस्कृति की जननी है संस्कृत

गया: गया काॅलेज के संस्कृत विभाग में गुरुवार को ‘वर्तमान समय में संस्कृत की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि यह विश्व की समस्त भाषाओं के साथ ही संसार व संस्कृति की जननी है. मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष जयनारायण पांडेय ने कहा कि संस्कार व्यक्ति विशेष की उपलब्धि […]

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गया: गया काॅलेज के संस्कृत विभाग में गुरुवार को ‘वर्तमान समय में संस्कृत की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि यह विश्व की समस्त भाषाओं के साथ ही संसार व संस्कृति की जननी है. मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष जयनारायण पांडेय ने कहा कि संस्कार व्यक्ति विशेष की उपलब्धि है और संस्कृति सामाजिक व राष्ट्रीय अस्मिता है, जिसका मूल स्रोत संस्कृत है. आज समाज में व्याप्त सभी समस्याओं का निदान संस्कृत है जो मानवता को न सिर्फ विनाश से बचा सकता है, बल्कि विश्व शांति का पैगाम भी दे सकता है.
मानव को मानव बनाने का संस्कृत ने दिया संदेश : विशिष्ट अतिथि पंडित आचार्य चंद्रशेखर मिश्र ने संस्कृत भाषा की सहजता व सरलता के साथ-साथ मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव के उपनिषद् मंत्र में मानव को मानव बनाने का संदेश दिया. संगोष्ठी में एमयू के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ दलवीर सिंह चौहान ने इसके वैज्ञानिक स्वरूप, शब्दों की व्युत्पत्ति, निरुक्त व विभिन्न पुराणों की भाषा की वैज्ञानिक व्याख्या की. उन्होंने दुर्गा सप्तशती में प्रयुक्त विभिन्न आख्यानों में धर्म व अध्यात्म की वैज्ञानिक व्याख्या व संस्कृत की प्रासंगिकता पर जोर दिया.
वेदपाठ से हुआ संगोष्ठी का शुभारंभ
संगोष्ठी का शुभारंभ राजा आचार्य व उनके छात्रों द्वारा वेदपाठ, कलाभारती की प्रस्तुति कुलगीत व डॉ रंजीत पांडेय द्वारा संस्कृत में स्वागत गान से हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गया कॉलेज के प्राचार्य डॉ एमएस इसलाम ने कहा कि उन्हें संस्कृत भाषा का ज्ञान न के बराबर है, लेकिन भारतीय संस्कृति की धरोहर होने के नाते इस भाषा से प्रेम करते हैं. उन्होंने कहा कि अपनी तीनों बेटियों को उन्होंने सीबीएसइ स्तर तक संस्कृत पढ़ाया. कार्यक्रम में डॉ कविता सहाय ने स्वरचित आद्याशक्ति की स्तुति की. कार्यक्रम का संचालन गया काॅलेज के अंगरेजी के विभागाध्यक्ष डॉ केके नारायण ने किया व धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज के वित्तेक्षक सह गणित के विभागाध्यक्ष डॉ एम इलियास ने किया. संस्कृत के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ ब्रह्मचारी पांडेय की पुस्तक ‘संस्कृत ग्रंथों में वर्णित शिक्षा का सांस्कृतिक इतिहास’ का लोकार्पण किया गया.
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