विश्वगुरु बनाने के लिए जड़ों की ओर लौटना होगा

Updated at :18 Jan 2017 8:52 AM
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विश्वगुरु बनाने के लिए जड़ों की ओर लौटना होगा

बोधगया: मगध विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग स्थित डॉ राधाकृष्णन सभागार में मंगलवार को प्रगतिशील मगही समाज द्वारा अध्यात्म के बिना शिक्षा अधूरी विषय पर विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्राउटिष्ट यूनिवर्सल विश्वविद्यालय, अमेरिका के महासचिव आचार्य विमलानंद अवधूत ने कहा कि मैकाले ने हमारी संस्कृति को नष्ट करने के […]

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बोधगया: मगध विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग स्थित डॉ राधाकृष्णन सभागार में मंगलवार को प्रगतिशील मगही समाज द्वारा अध्यात्म के बिना शिक्षा अधूरी विषय पर विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्राउटिष्ट यूनिवर्सल विश्वविद्यालय, अमेरिका के महासचिव आचार्य विमलानंद अवधूत ने कहा कि मैकाले ने हमारी संस्कृति को नष्ट करने के लिए जो शिक्षा-प्रणाली अपनायी थी, उसी का आज तक अंधाधुंध अनुसरण कर हम भारत की सांस्कृतिक धरोहर को पूरी तरह खोखला कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि अगर हमें भारत को विश्वगुरु बनाना है, तो हमें पुन: अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा. अपनी ढह रही नींव को मजबूत करना होगा. यह हम तभी कर सकते हैं जब अध्यात्म को शिक्षा से जोड़ें और शिक्षा को मातृभाषा से हर शिक्षण संस्थान को जोड़ने की जरूरत.
मुख्य अतिथि के रूप में एमयू के प्रतिकुलपति प्रो कृतेश्वर प्रसाद ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हर शिक्षण संस्थान को जोड़ने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हम बहुत पहले से ही यह जानते हैं कि प्रकाश अंदर से बाहर की ओर फैलता है, बाहर से अंदर की ओर नहीं. दुनिया आज उस गॉड पार्टिकल की खोज में बड़ा शोध करने में जुटी है.

कार्यक्रम में साहित्य महापरिषद के उपाध्यक्ष कुमार कांत, राजीव रंजन, डॉ अब्दुल मन्नान अंसारी, डॉ ब्रजराज मिश्र, सुरेंद्र पांडेय सौरभ वासुदेव प्रसाद व अन्य शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर व प्रगतिशील मगही समाज के संस्थापक प्रभात रंजन सरकार के फोटो पर माल्यार्पण कर किया गया.

अध्यात्म के बिना शिक्षा हो जाती है उच्चशृंखल
विचारगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए साहित्य महापरिषद के अध्यक्ष डॉ रामसिंहासन सिंह ने कहा कि अध्यात्म के बिना शिक्षा उच्चशृंखल हो जाती है. वह जीवन मूल्यों व मानवीय मूल्यों से दूर हो जाती है. साथ ही, वह संस्कृति व सभ्यता से भी दूर हो जाती है. उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र या समाज संस्कृति व सभ्यता से दूर होता है तब वह हाहाकार कर उठता है. एमयू के मगही के विभागाध्यक्ष डॉ भरत सिंह ने भी विचार रखा व शिक्षा को अध्यात्म से जोड़ने पर बल दिया.
हम वैदिक शिक्षा प्रणाली को भूल अर्थतंत्र के जाल में उलझ गये
गया काॅलेज में अंगरेजी के विभागाध्यक्ष डॉ केके नारायण ने कहा कि हमें आज यह समझ में नहीं आ रहा रहा है कि शिक्षा हमारे यहां मनुष्य निर्माण का साधन है या फिर पैसा निर्माण का. उन्होंने कहा कि आज समाज में जितनी भी विकृतियां आ रही है उसका मूल कारण भी यही है. शायद आज हम अपनी वैदिक शिक्षा प्रणाली को भूल कर अर्थतंत्र के जाल में उलझ गये हैं. ऊपरी चमक-दमक के पीछे के स्याह अंधेरे में हमारी पूरी मानवता और संस्कृति विलुप्त होती जा रही है. आज मनुष्य रूपी प्रजाति को बचाना है तो, हमें शिक्षा को अध्यात्म से जोड़ना होगा. डॉ नारायण ने आत्मा के ऊपर पांच स्तरीय आवरण की विस्तृत चर्चा की और कहा कि यदि आत्मा के उस प्रकाश से अपने को जोड़ना है तो हमें उन आवरण को एक-एक कर हटाना होगा. उन्होंने कहा कि पंचकोसी यात्रा हमारी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है.
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