आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता : दलाई लामा

Updated at :07 Jan 2017 4:19 AM
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आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता : दलाई लामा

बोधगया: बोधगया स्थित कालचक्र मैदान में शुक्रवार को 34वीं कालचक्र पूजा के दौरान प्रवचन देते हुए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता है. आतंकी कभी धार्मिक नहीं हो सकते. क्रोध, ईर्ष्या व क्लेश के कारण लोग दूसरों को दुख पहुंचाने में लगे हैं. हत्या तक कर रहे हैं. […]

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बोधगया: बोधगया स्थित कालचक्र मैदान में शुक्रवार को 34वीं कालचक्र पूजा के दौरान प्रवचन देते हुए बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता है. आतंकी कभी धार्मिक नहीं हो सकते. क्रोध, ईर्ष्या व क्लेश के कारण लोग दूसरों को दुख पहुंचाने में लगे हैं. हत्या तक कर रहे हैं. उन्होंने मन में उत्पन्न क्लेश की चर्चा करते हुए कहा कि आज मुसलिम आतंकवादी के साथ ही बुद्धिष्ट आतंकवादी भी देखे जा रहे हैं. धर्मगुरु ने म्यांमार का उदाहरण व अमेरिका में छपी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि म्यांमार में बुद्धिष्ट भी आतंकी हो गये हैं. यह सर्वथा गलत, मानवता व धर्म के खिलाफ है.
शत्रु से भी करो प्रेम, बन जायेगा मित्र : कालचक्र पूजा के पांचवें दिन करीब दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं व बौद्ध भिक्षुओं को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा कि शत्रु व नुकसान पहुंचाने वालों से भी प्रेम करना सीखिए, वह भी आपका मित्र बन जायेगा. उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि व्यभिचार, नशा व शराब का सेवन आदि से मन अशांति की ओर बढ़ता है और इसके कारण क्लेश पैदा होता है. धर्मगुरु ने कहा कि क्लेश को त्याग कर सुख की प्राप्ति की जा सकती है. साथ ही, क्लेश को दबाने से यह बार-बार उत्पन्न होगा, इस कारण क्लेश को अपने मन-विचार से हमेशा-हमेशा के लिए निर्वासित (बाहर) कर देना चाहिए. इससे प्रेम, करुणा व बोधिचित्त का विकास होता है और जीवन सफल हो जाता है. दलाई लामा ने अपने प्रवचन के दौरान कई उदाहरण पेश करते हुए प्रेम व घृणा के अवयव दृष्टांत किये.
बौद्ध मठों पर ली चुटकी : प्रवचन के दौरान दलाई लामा ने व्यक्ति को राग, द्वेष, तृष्णा व अहंकार त्यागने की सीख देते हुए कहा कि महान बौद्ध विद्वान नागार्जुन ने भी अपने लिए कोई बौद्ध मठ का निर्माण नहीं कराया था, पर वर्तमान में दिखावे व अन्य कारणों से बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बड़े-बड़े बौद्ध मठों का निर्माण कराया जा रहा है. यह दिखावे के लिए प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि आपकी बुद्धिमता दूसरों की भलाई में लगनी चाहिए, न कि किसी को नुकसान या बेवकूफ बनाने में. उन्होंने कहा कि आपका आचरण ही तय करेगा कि भविष्य में आपके साथ कैसा होने वाला है. मानव जीवन प्राप्त होने के पीछे भी आपके कर्म ही सबसे बड़ा कारक होता है. प्रवचन के समापन तक उन्होंने इस बात को दोहराया कि आंतरिक क्लेश हमें बार-बार हराता रहेगा, इस कारण उसे हमेशा-हमेशा के लिए नष्ट करने का प्रयास करें. यह एक दिन में संभव नहीं है, पर प्रयास जारी रखें. शुक्रवार को दलाई लामा का प्रवचन सुननेवालों की संख्या दो लाख से ज्यादा आंकी गयी. प्रवचन सुननेवालों में हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे भी शामिल रहे. इस दौरान दलाई लामा ने सर्वधर्म समभाव कार्यक्रम में भी भाग लिया व कहा कि सभी धर्मों का सार है आपस में प्रेम करो.
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