जीवन-मरण का मर्म समझेंगे श्रद्धालु
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :03 Jan 2017 8:48 AM
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बोधगया: दलाई लामा के नेतृत्व में सिद्ध लामाओं द्वारा भूमिपूजन के साथ सोमवार को यहां कालचक्र पूजा का आगाज हो गया. पूजा के शुभारंभ के अवसर पर मंत्रोच्चार के साथ दलाई लामा ने भूमि पूजन कराया व श्रद्धालुओं को कालचक्र पूजा से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए संकल्प दिलाया. कालचक्र पूजा को जीवन […]
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बोधगया: दलाई लामा के नेतृत्व में सिद्ध लामाओं द्वारा भूमिपूजन के साथ सोमवार को यहां कालचक्र पूजा का आगाज हो गया. पूजा के शुभारंभ के अवसर पर मंत्रोच्चार के साथ दलाई लामा ने भूमि पूजन कराया व श्रद्धालुओं को कालचक्र पूजा से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए संकल्प दिलाया. कालचक्र पूजा को जीवन में समय के चक्र को समझने का अनुष्ठान बताते हुए दलाई लामा ने लोगों को बताया कि कैसे मनुष्य का जीवन चक्र चलता है व इसी के बीच कैसे जीवन-मरण का खेल भी चल रहा होता है.
दलाई लामा ने लोगों को बताया, इसमें खास यह होता है कि जीवन से मरण के बीच वाली समयावधि में ही मनुष्य को अपने तमाम कर्म भी करने होते हैं. श्रद्धालुओं के समूह को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने बताया कि और मनुष्य के कर्मों के आधार पर ही आगे का उसका जीवन भी निर्भर करता है. यानी उसके अगले जीवन की गति क्या और कैसी होगी, यह एक व्यक्ति के कर्मों से ही तय होता है.
ऊपरोक्त मौके पर कालचक्र पूजा के संदर्भ में सारनाथ स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तिब्बतन स्टडीज के बौद्ध दर्शन विभाग के प्रोफेसर सुमित असंगा ने बताया कि दलाई लामा श्रद्धालुओं को जीवन-मरण के रहस्यों के साथ ही जीवन के कालचक्र के बारे में भी बतायेंगे. इसके तहत सभी प्राणियों के हित में सोचना, सभी कुकर्मों का त्याग करना, दूसरों को हानि नहीं पहुंचाना, अहिंसा का रास्ता अपना आदि जैसे विषयों पर दलाई लामा का प्रवचन होगा.
हर देश के श्रद्धालुओं के लिए अलग जगह
कालचक्र पूजा पंडाल में अलग-अलग देशों से आये बौद्ध श्रद्धालुओं के बैठने के लिए अलग-अलग दीर्घा बनाया गया है. बौद्ध लामाओं को आम श्रद्धालुओं से अलग रखा गया है. पूजा आयोजन समिित ने पश्चिमी देशों के साथ ही दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से आये श्रद्धालुओं के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की है. इनके लिए दलाई लामा के लिए तैयार मंच के दाहिनी ओर बैठने की व्यवस्था की गयी है. इनके अतिरिक्त दूसरे देशों से आये लोगों के लिए भी बैरिकेडिंग कर उनकी जगह तय की गयी है. ताइवान, चीन, वियतनाम व थाईलैंड समेत अन्य देशों से बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए भी कालचक्र मैदान में अलग-अलग जगह रखी गयी है. इससे अलग हिमालय के तराई क्षेत्र से आये लोगों को कालचक्र मैदान के सबसे पश्चिमी हिस्से में बैठने की जगह उपलब्ध करायी गयी है. प्रवचन के दौरान पूजा समिति की तरफ से डबल पावरोटी व चाय उपलब्ध कराये जाने का इंतजाम किया गया है. वैसे, बाहर से खाने-पीने की चीजें लेकर मैदान के अंदर प्रवचन स्थल तक आने की इजाजत नहीं है.
सभी फोटो- सनत मिश्र
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