एमयू में हजारों स्टूडेंट्स पीजी में दाखिले से वंचित!
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :07 Oct 2016 4:52 AM
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बोधगया: मगध विश्वविद्यालय (एमयू) के अधीन अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों से स्नातक पास करीब एक लाख स्टूडेंट्स में से करीब 90 हजार से ज्यादा पीजी में नामांकन से वंचित रह गये. आधे स्टूडेंट्स ही पीजी में नामांकन की चाहत रखते हों, लेकिन सीटों की कमी के कारण उन्हें नामांकन से वंचित होना पड़ गया. सूबे […]
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बोधगया: मगध विश्वविद्यालय (एमयू) के अधीन अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों से स्नातक पास करीब एक लाख स्टूडेंट्स में से करीब 90 हजार से ज्यादा पीजी में नामांकन से वंचित रह गये. आधे स्टूडेंट्स ही पीजी में नामांकन की चाहत रखते हों, लेकिन सीटों की कमी के कारण उन्हें नामांकन से वंचित होना पड़ गया. सूबे में बढ़ रही शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोतरी के पीछे शायद यह भी एक कारण है कि स्नातक के बाद पीजी के लिए सीटों की कमी से स्नातकोत्तर में नामांकन नहीं हो पाता है.
अब छात्र-छात्राओं के समक्ष रोजगार की तलाश के सिवाय दूसरा कोई रास्ता भी नहीं बच पाता. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मगध विश्वविद्यालय के अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों से करीब एक लाख 52 हजार स्टूडेंट्स ने स्नातक (विज्ञान, कला व वाणिज्य) की परीक्षा दी थी. एमयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ नंद कुमार यादव ने बताया कि लगभग 60 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं. इस तरह करीब एक लाख स्टूडेंट्स स्नातक पास कर उच्च शिक्षा की चाहत रखते होंगे व इसे लेकर मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय व पीजी की पढ़ाई होने वाले विभिन्न कॉलेजों में दाखिला के लिए आवेदन भी किया होगा.
इन्फ्रास्ट्रक्चर व शिक्षकों की भारी कमी
एमयू के पदाधिकारियों का कहना है कि पीजी की पढ़ाई शुरू कराने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर व शिक्षकों का भी अभाव है. फिलहाल जिन कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई शुरू करायी गयी है, वहां भी पूर्ण रूप से सभी सुविधा व संसाधनों के साथ ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. पदाधिकारियों का कहना है कि सभी कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई शुरू कराने से समस्या का समाधान नहीं हो पायेगा, बल्कि इसके लिए मुकम्मल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही शिक्षक व कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ानी होगी. बहरहाल, व्यवस्था का दंश झेल रहे हजारों छात्र-छात्राओं के समक्ष स्नातक पास करने के बाद रोजगार की तलाश करना या घर बैठने के सिवाय और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है.
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