सफलता शराबबंदी की, कहानी गया से : अब आय तो बढ़ी ही सेहत भी सुधर रही है
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :04 Oct 2016 6:19 AM
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गया : सर जानते हैं, शराबबंदी ने मेरे घर को टूटने से बचा लिया. मैं तो शुक्रगुजार हूं बिहार सरकार का कि इसने और अधिक मुश्किलों में फंसने से बचा लिया.’ ये बातें कहते हुए गया में रहनेवाले मुकेश कुमार लंबी सांस लेते हुए थोड़ी देर के लिए चुप हो जाते हैं, थोड़ी देर बाद […]
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गया : सर जानते हैं, शराबबंदी ने मेरे घर को टूटने से बचा लिया. मैं तो शुक्रगुजार हूं बिहार सरकार का कि इसने और अधिक मुश्किलों में फंसने से बचा लिया.’ ये बातें कहते हुए गया में रहनेवाले मुकेश कुमार लंबी सांस लेते हुए थोड़ी देर के लिए चुप हो जाते हैं, थोड़ी देर बाद जब ध्यान टूटता है, तो फिर बोलने लगते हैं.
बताते हैं कि कैसे शराब के नशे की गिरफ्त में आने के बाद से लगातार परिवार की बदहाली बढ़ती गयी थी. शराब में खर्च तो बढ़े ही थे, नशे के कारण आय भी कम हो गयी थी. पर, शराबबंदी के बाद जिंदगी में बदलाव आया. एक तरफ जहां परिवार की आय बढ़ी, तो दूसरी तरफ शराब के चलते बिगड़ी सेहत भी अब सुधार रही है.
मुकेश (35 वर्ष) गुरुआ के ऊपरडीह में रहते हैं और फूल-माला का कारोबार करते हैं. उनके घर का सारा खर्च इसी कारोबार से चलता था. पर, शराब की लत ने दुकान की पूंजी डूबो दी.
एक समय आया, जब शराब ही मुकेश की पूरी दुकान को पी गयी. नशे में धुत हाेकर दुकान पर बैठने पर उनके ग्राहक भड़कने लगे. चूंकि फूल-माला लाेग अक्सर पूजा-पाठ के लिए ले जाते हैं, इसलिए पवित्रता का ध्यान रखनेवाले कुछ ज्यादा संवेदनशील हो गये और उन्होंने दुकान पर आना बंद कर दिया. दुकान पर ग्राहक कम हुए, तो कमाई भी कम हो गयी. जो कमाई होती, वह शराब में चली जाती. एेसे में घर में रोज कलह होने लगी. बच्चों की पढ़ाई बाधित होने लगी और आये दिन घर में मारपीट शुरू हो गयी.
मजबूरी में मुकेश की पत्नी ने खुद दुकान संभालने का फैसला किया. इसी बीच सरकार ने शराबबंदी का फैसला कर लिया. शराब बंद होते ही मुकेश कुछ दिनों तक ताे शराब नहीं मिलने की स्थिति में खाेये-खाेये से रहे. फिर दाे-चार दिन बाद कहीं से महंगी शराब लेकर पी ली. लेकिन, यह सब आखिर कितने दिनाें तक चलता. पीने के बाद पकड़े जाने के भय ने मुकेश को शराब से दूरी बढ़ाने को मजबूर किया. किरण कहती हैं कि उनका घर टूटने से बच गया. एक बार फिर से जिंदगी पटरी पर आ गयी है. अब मुकेश फिर से नियमित उसी दुकान पर बैठने लगे हैं. अच्छे से बात करने के कारण अब ग्राहकों की संख्या बढ़ी है और आय भी. पत्नी भी अब पिटती नहीं. बच्चाें के लालन-पालन से लेकर पढ़ाई-लिखाई के लिए सामने अच्छी उम्मीद दिख रही है.
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