शिक्षा का यह हाल, तो शिक्षक क्या करेंगे

आज शिक्षक दिवस पर हम सभी जीवन में शिक्षकों के महत्व पर बात कर रहे हैं. यह शिकायत आम है कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति हो रही है. पर यह भी सही है कि सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा के लिए जिस आधारभूत ढांचे की जरूरत है, उसकी बेहद कमी […]
आज शिक्षक दिवस पर हम सभी जीवन में शिक्षकों के महत्व पर बात कर रहे हैं. यह शिकायत आम है कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति हो रही है. पर यह भी सही है कि सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा के लिए जिस आधारभूत ढांचे की जरूरत है, उसकी बेहद कमी है.
उदाहरण के लिए मुसाबनी प्रखंड के माटीगोड़ा पंचायत के पोंडाकोचा उत्क्रमित विद्यालय को देख सकते हैं. यहां बच्चों का ज्यादातर समय मध्याह्न भोजन और पीने के पानी के इंतजाम में चला जाता है. ऐसा नहीं है कि इनके स्कूल में चापाकल नहीं है. पर जो चापाकल है उसका पानी बेहद प्रदूषित है. इसलिए ये एक किलोमीटर दूर जाकर दूसरे चापाकल से पानी लाते हैं. डंडों के सहारे बच्चे बाल्टी कंधों पर टांग लेते हैं और इस तरह उनकी पढ़ाई चलती रहती है.
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