मां तुझे सलाम..से हुआ गर्व का अहसास मंगल पांडे की फांसी से ठहर गयीं सांसें
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :24 Aug 2016 7:33 AM
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गया: ‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं…’ बॉर्डर फिल्म के इस गाने पर जब छात्रों ने प्रस्तुति दी, तो बॉर्डर पर रह कर देश की रक्षा में अपनी जान आहूत कर देनेवाले जवानों की मन:स्थिति जीवंत हो गयी. गाने के हर बोल व संदर्भ पर लोग भाव विह्वल व भावविभाेर हो रहे थे. मौका था […]
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गया: ‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं…’ बॉर्डर फिल्म के इस गाने पर जब छात्रों ने प्रस्तुति दी, तो बॉर्डर पर रह कर देश की रक्षा में अपनी जान आहूत कर देनेवाले जवानों की मन:स्थिति जीवंत हो गयी. गाने के हर बोल व संदर्भ पर लोग भाव विह्वल व भावविभाेर हो रहे थे. मौका था गया काॅलेज में बीते 15 दिनों से चल रहे ‘आजादी-70 याद करो कुरबानी’ कार्यक्रम के समापन का. मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति थीम पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किये गये मैदान-ए-जंग का नाट्य मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
समारोह में देशभक्ति गीत-संगीत नृत्य का ऐसा रंग चढ़ा कि कॉलेज के विद्यार्थियों के दिलोदिमाग से देर शाम तक उतरने का नाम नहीं ले रहा था. इससे पहले समापन समारोह का शुभारंभ जिलाधिकारी के आगमन पर स्वागत गान से शुरू हुआ. छात्राओं ने कॉलेज का अपना गीत भी प्रस्तुत किया.
राष्ट्र पहले, फिर कोई व्यक्ति : डीएम
कार्यक्रम में मौजूद जिलाधिकारी रवि कुमार ने कहा कि राष्ट्र पहले है फिर कोई व्यक्ति है. यह इस देश का पहला वसूल है. इसके इतर कोई नहीं है. यही वजह है कि लोकतंत्र से परे किसी भी शक्ति ने न यहां काम किया है और न ही कर सकेगी. स्वतंत्रता बड़ी चीज है. आजादी के बाद से हमें बोलने की आजादी मिली है. याद कीजिए जब यह अधिकार नहीं था, तब स्वतंत्रता सेनानियों ने कितनी विपरीत परिस्थितियों में अपनी जंग को जारी रखा होगा. उनकी निजी व सामाजिक कुरबानी को हम याद करो कुरबानी के माध्यम से ही सैल्यूट कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि आजादी के 70 वर्ष हो चुके हैं. यूएस की तुलना में यह कोई ज्यादा वक्त नहीं है. इस 70 साल को गौर से देखने, सोचने व समझने की जरूरत है. खासकर राष्ट्र के प्रति खुद की जिम्मेदारी का मुद्दा अहम है. राष्ट्र व समाज के प्रति जिम्मेवार होना व्यक्ति का पहला वसूल होना चाहिए. जिस शहर के लोग व कॉलेज के स्टूडेंट्स समाज व राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेवारी समझते हैं, वहां का माहौल बड़ा सुखद होता है. उम्मीद है कि गया कॉलेज के छात्र भी एक जिम्मेवार की भूमिका में राष्ट्र व समाज के लिए बेहतर योगदान देंगे.
छात्रों की सफलता ही गुरुदक्षिणा
कॉलेज के छात्र-छात्राओं की सफलता ही मेरे लिए गुरु दक्षिणा के समान है. इससे बड़ी खुशी कॉलेज प्रशासन व शिक्षकों के लिए कुछ और नहीं हो सकती है. ये बातें गया कॉलेज के प्रिंसिपल शमसुल इसलाम ने समापन समारोह में कहीं. उन्होंने कहा कि ‘याद करो कुरबानी’ कार्यक्रम की सफलता कॉलेज के विद्यार्थियों व शिक्षकों की लगन व अथक मेहनत की देन है. उनके इस कार्य की सराहना के लिए शब्दकोश में कोई शब्द नहीं है. विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे देश व समाज के प्रति सकारात्मक साेचवाले नागरिक बनें व अपने जीवन को सार्थक बनायें. इस मौके पर उन्होंने कॉलेज की उपलब्धियों व खूबियों पर प्रकाश डाला. प्रिंसिपल ने बताया कि इतने बड़े स्तर पर रंगारंग देशभक्ति कार्यक्रम कॉलेज के इतिहास में पहली बार हुआ है. उन्होंने कहा कि यह दावा मैं इसलिए कर सकता हूं कि मैं खुद इसी कॉलेज का छात्र रहा हूं और इसी कॉलेज के यूनिवर्सिटी में कार्यरत रहा हूं. कॉलेज के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है.
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