बाल संरक्षण के लिए सिर्फ नियम-कानून काफी नहीं

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गया: बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक आलोक रंजन ने कहा कि बाल संरक्षण के लिए बनाये गये नियम-कानून ही काफी नहीं है. सरकार द्वारा बाल संरक्षण के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं से जुड़े सभी एजेंसी, संगठन व विभाग के आपसी समन्वय से ही बाल संरक्षण संभव है. उन्होंने बाल मजदूरी, बाल विवाह […]

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गया: बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक आलोक रंजन ने कहा कि बाल संरक्षण के लिए बनाये गये नियम-कानून ही काफी नहीं है. सरकार द्वारा बाल संरक्षण के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं से जुड़े सभी एजेंसी, संगठन व विभाग के आपसी समन्वय से ही बाल संरक्षण संभव है. उन्होंने बाल मजदूरी, बाल विवाह व बाल व्यापार पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसके कारण व निदान बताया. वे सेव द चिल्ड्रेन व अग्रगामी इंडिया के संयुक्त तत्त्वावधान में बुधवार को होटल गर्व रेसिडेंसिया में बाल संरक्षण पर आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे.
श्रम अधीक्षक राकेश रंजन ने बाल संरक्षण के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजना पर विस्तार से चर्चा की. सेव द चिल्ड्रेन के कार्यक्रम समन्वयक पीयूष कुमार ने कहा कि सरकार के विभिन्न विभागों से समन्वय बना कर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है. इसी कड़ी में बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, बाल संरक्षण इकाई व विशेष किशोर पुलिस इकाई के अधिकारियों को विचार गोष्ठी में आमंत्रित किया गया है.

बाल कल्याण समिति के शिवदत्त कुमार ने बाल विवाह का मुख्य कारण दहेज प्रथा व असुरक्षा समेत बाल श्रम पर विस्तार से चर्चा की गयी. उन्होंने सरकार के नियमों में व्याप्त पेच पर भी फोकस किया. किशोर न्याय परिषद के सदस्य सुनील कुमार ने बच्चों के पुनर्वास की समस्या रखी. किशोर न्याय अधिनियम के राज्य सलाहकार सदस्य तारकेश्वर सिंह ने सरकारी व गै-सरकारी संस्थाओं के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए बाल श्रम, बाल विवाह व बाल व्यापार पर रोक लगाने के लिए बने विभिन्न कानूनों की जानकारी दी. वहीं, अग्रगामी इंडिया के परियोजना समन्वयक फैसल करीम ने भी गोष्ठी को संबोधित किया.

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