चिकित्सक मिले, अब कर्मचारियों का टोटा

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धनबाद : स्वास्थ्य केंद्रों में हमेशा चिकित्सकों की कमी का रोना रोया जाता है. लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत हाल ही में जिले में शुरू किये गये शहरी स्वास्थ्य केंद्र में मामला उलट है. यहां तीन माह पहले ही चिकित्सक बहाल कर दिये गये हैं, लेकिन अबतक नर्स, पारा मेडिकल कर्मचारियों की बहाली नहीं हो […]

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धनबाद : स्वास्थ्य केंद्रों में हमेशा चिकित्सकों की कमी का रोना रोया जाता है. लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत हाल ही में जिले में शुरू किये गये शहरी स्वास्थ्य केंद्र में मामला उलट है. यहां तीन माह पहले ही चिकित्सक बहाल कर दिये गये हैं, लेकिन अबतक नर्स, पारा मेडिकल कर्मचारियों की बहाली नहीं हो सकी है.

कर्मचारियों की कमी के कारण केंद्र नहीं खुल रहे हैं. इससे शहरी क्षेत्र के गरीबों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.

सात चिकित्सकों की हुई है बहाली :
शहरी केंद्रों के लिए सात चिकित्सकों की बहाली संविदा पर की गयी थी. इन चिकित्सकों को उनके केंद्रों के लिए नोटिस भी निकाल दिया गया. लेकिन केंद्रों में न कुर्सी है और न बेंच. यहां चिकित्सा कर्मचारी भी नहीं है. इसपर चिकित्सकों ने सिविल सर्जन से संसाधन व कर्मचारियों की मांग की है.
भूली, चिरागोड़ा, राजबाड़ी झरिया, छाताबाद, कतरास सहित सात जगहों पर केंद्र खोले गये हैं. भूली के लिए डा. सैयद मासूम आलम, छाताबाद के लिए डा. सुशील कुमार, राजबाड़ी के लिए डा. राहुल, चीरागोड़ा के लिए डा. मंडल आदि को नियुक्त किया गया है.
ऐसा होना चाहिए केंद्र : केंद्र में एक पार्ट टाइम व एक फुल टाइम चिकित्सक रहना है. पार्ट टाइम चिकित्सक तो मिल गये, लेकिन फुल टाइम चिकित्सक नहीं आये. इसके साथ ही एक एएनएम, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक स्टाफ ब्वाय को संविदा के आधार पर केंद्र में रखना है. लेकिन अबतक कर्मचारियों की बहाली नहीं की गयी है. केंद्र खुलने का समय शाम चार बजे से आठ बजे तक है. क्योंकि दिन में शहरी गरीब काम करने चले जाते हैं.
वर्षों से नहीं दिये टैक्स, नगर निगम का तेवर तल्ख
विभिन्न कंपनियों के कुल 10 मोबाइल टावरों को सील करने का आदेश नगर आयुक्त विजय कुमार ने दिया है. उन्होंने कहा कि शहर में लगे टावरों का टैक्स लंबे समय से नगर निगम को नहीं दिया गया है.
इससे पहले नोटिस जारी कर 10 दिसंबर तक बकाया जमा करने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन टैक्स जमा नहीं कराया गया. नगर आयुक्त ने उक्त सभी टावरों को 28 दिसंबर तक सील कर देने का आदेश जारी किया है. उन्होंने बताया कि पहले चरण में 10 टावरों को सील किया जा रहा है, बकाया नहीं मिलने पर फेज बना कर दूसरे टावरों को भी सील कर दिया जायेगा. इसके लिए उन्होंने पांच टीमें भी तैयार कर दी हैं, जो टावरों को सील करेंगे. सील होनेवाले टावर बीएसएनएल, रिलायंस, टाटा इंडीकॉम, आइडिया व एयरटेल के हैं.
कुल 263 मोबाइल टावर, बकाया एक करोड़ 98 लाख : जानकारी के मुताबिक, शहरी इलाकों में कुल 263 मोबइल टावर हैं. इन सभी को मिला कर करीब एक करोड़ 98 लाख रुपये का बकाया है. नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों को कुछ अंतराल पर नोटिस भेजा जाता है, लेकिन वे इसे नजरअंदाज कर देते हैं. कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जिनका आॅफिसियल पता भी हर कुछ महीने में बदल जाता है. ऐसे में उन्हें नोटिस देना भी संभव नहीं हो पाता है.
उपभोक्ताओं की बढ़ेगी परेशानी : मोबाइल कंपनियों के टावर सील हो जाने से कंपनियों को तो आर्थिक नुकसान उठाना ही पड़ेगा, उपभोक्ताओं के लिए परेशानी हो जायेगी. शहर में सिम कार्ड के बड़े कारोबारी विशाल अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल टावर के सील होते ही उस इलाके में कंपनी का नेटवर्क आना बंद हो जायेगा. इससे उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ जायेंगी. नेटवर्क यूज नहीं होने से कंपनी को आर्थिक नुकसान होगा.
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