सत्संग के बिना मनुष्य का कल्याण नहीं : आशुतोषानंद

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सत्संग के बिना मनुष्य का कल्याण नहीं : आशुताेषानंद फोटो-01 श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते सुनाते स्वामी आशुतोषानंद गिरि.रानीगंज बाजार में चल रहा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा यज्ञ प्रतिनिधि, इमामगंज बिन सत्संग विवेक न होइ, रामकथा बिन सुलभ न होइ. संतों के सत्संग किये बिना मनुष्यों की कल्याण नहीं हो सकता है. […]

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सत्संग के बिना मनुष्य का कल्याण नहीं : आशुताेषानंद फोटो-01 श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते सुनाते स्वामी आशुतोषानंद गिरि.रानीगंज बाजार में चल रहा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा यज्ञ प्रतिनिधि, इमामगंज बिन सत्संग विवेक न होइ, रामकथा बिन सुलभ न होइ. संतों के सत्संग किये बिना मनुष्यों की कल्याण नहीं हो सकता है. सनातन धर्म के सभी धर्मग्रंथों में एेसे कई कथाएं मिलती हैं, जहां संत के बिना मनुष्यों का कल्याण संभव नहीं होने का उल्लेख है. जब मनुष्य एक बार संत की शरण में आ जाता है, तो इस जगत में रह कर भी वह ईश्वर को भूल नहीं सकता. ये बातें इमामगंज प्रखंड के रानीगंज बाजार में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा यज्ञ में स्वामी आशुतोषानंद गिरि जी महाराज नेे कहीं. कथा के दूसरे दिन स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से कहा कि क्षितिज, जल, आग, गगन व वायु, इन पांच तत्वों से ही संसार चल रहा है और इन पर भगवान का ही नियंत्रण है. स्वप्न में राजा रंक बन जाता है और रंक राजा बन जाता है. लेकिन, स्वप्न खत्म होते ही हकीकत का पता चल जाता है. ठीक उसी प्रकार जब मनुष्य भगवान की शरण में चला जाता है, तो वह भौतिक सुखों से परे हो जाता है. उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा वह ही सुन सकता है, जो भावुक व रसिक हो. जो मनुष्य अपने तर्कों से भगवान को पाने की इच्छा रखता है, उससे बड़ा मूर्ख कोई और नहीं है. सभी धर्मग्रंथ मुक्ति व भवसागर को पार करनेवाले हैं. मनुष्य को भगवान का हमेशा स्मरण करते रहना चाहिए, ताकि उनकी दया-दृष्टि हमेशा बनी रहे. स्वामी जी कहा कि जब-जब धर्म व भक्त पर खतरा मंडरा रहा होता है, तो भगवान प्रगट हो कर उनकी रक्षा करते हैं. एक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक बार मां पार्वती ने भगवान शंकर से अमरकथा सुनाने की बात कहीं. भगवान शंकर ने मां पार्वती के सामने एक शर्त रखते हुए कहा कि जब तक उनकी कथा खत्म नहीं होती, तब तक तुम सोना नहीं और हम दोनों के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति यहां मौजूद न रहे. भोले शंकर की शर्त मानते हुए मां पार्वती ने उन्हें अमरकथा सुनाने का आग्रह किया. भगवान शिव ने कथा शुरू की, तो बीच में ही मां पार्वती सो गयी और पक्षी के रूप धरे शुकदेव जी महाराज ने पूरी अमरकथा सुन ली. जब भगवान शंकर ने अमरकथा के अंत में परमात्मा का जयकारा लगाया, तब मां पार्वती नींद से जागी. भगवान शंकर ने मां पार्वती से पूछा कि उन्हें अमरकथा कैसी लगी. मां पार्वती ने कहा कि वह अमरकथा के बीच में ही सो गयी थीं, तो भगवान शंकर ने यह समझते देर नहीं लगी कि कोई तीसरे व्यक्ति ने अमरकथा सुन ली है. भोले शंकर ने अपने त्रिशूल को आदेश दिया कि जिसने भी अमरकथा सुनी है, उसे मार दो. इसके डर से पक्षी का रूप धरे शुकदेव जी श्रृंगार कर रही वेदव्यास की पत्नी के मुख से उनके गर्भ में प्रवेश कर गये. शुकदेव महाराज का पीछा करते हुए त्रिशूल वेदव्यास की गुफा के पास आया और पूछा कि यहां कोई आया है क्या? त्रिशूल को बताया गया कि यहां कोई नहीं आया है. इस प्रकार अमरकथा सुन कर शुकदेव ने जग का कल्याण किया. इस मौके पर सत्यनारायण गोयल, रूलीचंद्र पोद्दार, बसंती सांवरिया, जितु गोयल, सूरज पोद्दार, प्रकाश पोद्दार व पुष्पा पोद्दार सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे. क्रॉप्स कटिंग में मापी गयी धान की उत्पादकता फोटो 02 – क्रॉप कटिंग के बाद धान दिखलाते पदाधिकारी. प्रतिनिधि, इमामगंजबतेसा गांव के प्रगतिशील किसान भरत सिंह ने जीरो टिलेज से धान की खेती है. शुक्रवार को बीडीओ नंदकिशोर के नेतृत्व में धान की क्रॉप्स कटिंग की गयी. इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) सरोज कुमार मेहता ने बताया कि 10 मीटर लंबाई व पांच मीटर चौड़ाई के क्षेत्रफल में धान की फसल की कटाई की गयी और उत्पादन मापा गया. प्रति हेक्टर करीब 71 क्विंटल धान होने की संभावना है. इस मौके पर कृषि समन्वयक वीरमणि पाठक, सुधीर कुमार, हिमांशु कुमार सागर, किसान सलाहकार राधवेंद्र कुमार, अमरेंद्र कुमार, किसान उधो सिंह व तेतर प्रसाद सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे. बीडीओ ने की विकास कार्यों की जांच प्रतिनिधि, इमामगंज मलहारी पंचायत में चल रहे विकास कार्यों की बीडीओ नंदकिशोर ने शुक्रवार को जांच की. जांच के बाद बीडीओ ने बताया कि वह निर्माणाधीन इंदिरा आवासों, उनके लाभुकों व आगंनबाड़ी केंद्रों की वस्तुस्थिति से अवगत हुए. इंदिरा आवासों व लाभुकों की स्थिति ठीकठाक है, लेकिन आगंनबाड़ी केंद्रों में बच्चों उपस्थिति काफी कम दिखी. इस पर आगंनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने का निर्देश दिया गया. उन्होंने ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय, विजैनी की जांच के दौरान मात्र 19 बच्चे ही स्कूल में मिले, जबकि 93 बच्चे नामांकित हैं. बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने का निर्देश प्रभारी प्रधानाध्यापक को दिया गया. बीडीओ ने बताया कि इस तरह का निरीक्षण हमेशा होता रहेगा.

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