गया के ANMMCH में 32 बेड का PICU बनकर हुआ तैयार, हैंडओवर में फंसा पेंच

Updated at : 10 May 2024 5:45 AM (IST)
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ANMMCH में PICU वार्ड बनकर तैयार

एमसीएच के बगल में बन कर तैयार हुआ फेब्रिकेटेड पीआइसीयू वार्ड

एएनएमएमसीएच परिसर में 32 बेड का पीआईसीयू बनकर तैयार है, लेकिन हैंडओवर में दिक्कत आ रही है. ऐसे में 30 बेड के जनरल आईसीयू से काम चल रहा है. विभागाध्यक्ष ने कहा कि अभी भी कुछ काम बाकी है.

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गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMMCH) परिसर स्थित एमसीएच बिल्डिंग की बगल में 32 बेड का पीआइसीयू 2.10 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हो गया है. इसके हैंडओवर में कई तरह के पेंच फंस गये हैं. देखा जाये, तो एमसीएच में प्रसूताओं को ही भर्ती लिया जाता है. यहां जन्म लिये बच्चों को किसी तरह की दिक्कत होने पर तुरंत ही पीआइसीयू में भर्ती किया जा सकता है. काम करनेवाली एजेंसी ने अधीक्षक कार्यालय को हैंडओवर देने के लिए पत्र भी दे दिया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहां पर हैंडओवर लेने में दिक्कत आ रही है कि संबंधित एजेंसी को एस्टिमेट से अधिक काम करने का दबाव अस्पताल प्रशासन की ओर से बनाया जा रहा है. काम की सूची अस्पताल प्रशासन की ओर से लिखित रूप में एजेंसी को दी गयी है. एजेंसी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से जिस काम को करने के लिए कहा जा रहा है, वह काम उनके कार्ययोजना में शामिल नहीं है. कार्ययोजना से अधिक काम कराना उनके लिए संभव नहीं है.

इधर, 30 बेड का गाइनी वार्ड को रिमॉडलाइज कर जनरल आइसीयू तैयार करने के काम को अंतिम रूप दिया जा रहा है. यहां पर सेंटरलाइज एसी के साथ आइसीयू चालू होने के बाद अस्पताल नये लुक में दिखने लगेगा. इस योजना पर 2.15 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं. अस्पताल में पहले से इमरजेंसी वार्ड में 20 बेड, एमसीएच में छह बेड, 15 बेड का शिशु रोग विभाग में पीआइसीयू व 20 बेड का एनआइसीयू पहले से बना हुआ है.

क्या कहते हैं अस्पताल अधीक्षक

32 बेड के पीआइसीयू बनाने का काम पूरा होने पर ठेकेदार एजेंसी ने इसकी लिखित सूचना कार्यालय को उपलब्ध करा दी है. इसके बाद उनके माध्यम से शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष को कमेटी बनाकर हैंडओवर लेने को लिखा गया. विभागाध्यक्ष ने हैंडओवर लेने से पहले कुछ काम बाकी रहने की बात लिखित रूप से दी है. इसके बाद एजेंसी को पत्र देकर पूछा गया है कि यह काम उनके कार्ययोजना में शामिल था या नहीं. शामिल था, तो उसे जल्द पूरा करा दें. अन्यथा इसके बारे में लिखित रूप से सूचना दें. एजेंसी से जवाब आने के बाद ही हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जायेगी.

डॉ विनोद शंकर सिंह, अधीक्षक, एएनएमएमसीएच

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Anand Shekhar

लेखक के बारे में

By Anand Shekhar

Dedicated digital media journalist with more than 2 years of experience in Bihar. Started journey of journalism from Prabhat Khabar and currently working as Content Writer.

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