गबन की शिकायत आर्थिक अपराध इकाई के पास

Published at :23 Aug 2014 8:22 AM (IST)
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गबन की शिकायत आर्थिक अपराध इकाई के पास

गया: जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी)बोधगया में सरकारी रुपये गबन की शिकायत पटना स्थित आर्थिक अपराध इकाई में पहुंच गयी है. यह शिकायत पीएचसी के पूर्व प्रभारी डॉ विनोद कुमार वर्मा ने की है. आर्थिक अपराध इकाई को भेजे गये पत्र में डॉ वर्मा ने कहा है कि सरकारी रुपये का गबन कर लिपिक […]

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गया: जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी)बोधगया में सरकारी रुपये गबन की शिकायत पटना स्थित आर्थिक अपराध इकाई में पहुंच गयी है. यह शिकायत पीएचसी के पूर्व प्रभारी डॉ विनोद कुमार वर्मा ने की है.

आर्थिक अपराध इकाई को भेजे गये पत्र में डॉ वर्मा ने कहा है कि सरकारी रुपये का गबन कर लिपिक मुकेश कुमार सिंह ने अकूत संपत्ति अजिर्त की है. 2010 में श्री सिंह की पोस्टिंग बोधगया पीएचसी में हुई थी, तो उनके पास महज एक मोटरसाइकिल थी. वर्तमान में उनके पास स्विफ्ट डिजायर कार, एक स्कॉर्पियो, गया शहर के पॉश इलाके में डेढ़ कट्ठा जमीन, जो 2012-13 में खरीदी गयी है. इस जमीन पर भवन का निर्माण कराया गया है. इसके बाद भी उनके बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपये से अधिक जमा है. उन्हें, स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है. इस कारण उनके विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है.

ज्ञातव्य है कि बोधगया पीएचसी में गबन की राशि बढ़ कर 2,94,62,693 रुपये हो गयी है. इसका खुलासा मगध प्रमंडल के क्षेत्रीय उपनिदेशक, स्वास्थ्य (आरडीडीएच) डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भेजी गयी जांच रिपोर्ट से हुआ है. हालांकि, उन्होंने गबन का दायरा 30 करोड़ तब पहुंचने की आशंका जतायी है.

इसके लिए विशिष्ट दल से इस मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है. आरडीडीएच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 282 पेज में विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करा कर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भेजी है. इसमें सिविल सजर्न के संरक्षण में गबन होने की बात कही गयी है. रिपोर्ट में लिखा गया है कि नियंत्री पदाधिकारी होने के नाते सिविल सजर्न का दायित्व बनता है कि व्यक्तिगत स्तर से जांच करा कर विधि-सम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए थी. पर, ऐसा नहीं कर दोषी कर्मचारी के जाली मांग पत्र पर अतिरिक्त आवंटन उपलब्ध कराया गया. जबकि, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ उदय नारायण सिन्हा द्वारा दोषी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए बार-बार मार्गदर्शन मांगी जाती रही है. इतना ही नहीं, डॉ सिन्हा द्वारा बोधगया थाने में सरकारी राशि के गबन के आरोप में एफआइआर दर्ज की गयी है, जिसमें डॉ बीके वर्मा, लिपिक राम लखन पासवान व लिपिक मुकेश कुमार सिंह को नामजद आरोपित बनाया गया है. आरडीडीएच की जांच रिपोर्ट के अनुसार, गबन किये गये 2,94,62,693 रुपये वित्तीय वर्ष 2011-12 व 2012-13 की स्थापना कोष के हैं. इनमें 1,13,47,459 रुपये लिपिक मुकेश कुमार सिंह के निजी खाते में जमा कर कपट पूर्ण तरीके से गबन करने की बात कही गयी है.

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