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सूखा राहत का लेना है लाभ, ताे जमा करना हाेगा फॉर्म

Updated at : 15 Sep 2019 7:20 AM (IST)
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सूखा राहत का लेना है लाभ, ताे जमा करना हाेगा फॉर्म

गया : जिले के 10 प्रखंडाें की 86 ऐसी पंचायतें हैं, जहां 70 प्रतिशत से कम धान की राेपनी हुई है. इसकी खास वजह जरूरत से कम बारिश हाेना है. इन्हें सूखाग्रस्त पंचायत की श्रेणी में रखा गया है. इन पंचायताें के हरेक घर के मुखिया काे राज्य सरकार तीन हजार रुपये देगी. इस घाेषणा […]

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गया : जिले के 10 प्रखंडाें की 86 ऐसी पंचायतें हैं, जहां 70 प्रतिशत से कम धान की राेपनी हुई है. इसकी खास वजह जरूरत से कम बारिश हाेना है. इन्हें सूखाग्रस्त पंचायत की श्रेणी में रखा गया है. इन पंचायताें के हरेक घर के मुखिया काे राज्य सरकार तीन हजार रुपये देगी. इस घाेषणा के बाद सूखाग्रस्त पंचायत के लाेगाें में काफी खुशी देखी जा रही है.

जिले के 24 प्रखंडाें में डुमरिया, नगर, बेलागंज, काेंच, मानपुर, खिजरसराय, शेरघाटी, गुरारू, बांकेबाजार व बाेधगया प्रखंडाें की कुछेक पंचायतें ही सूखाग्रस्त की सूची में हैं. प्रखंडाें की सूखाग्रत पंचायताें की सूची कृषि विभाग के अधिकारी ने सर्वे कर बनायी है, जाे राज्य सरकार काे भेजी गयी है.
इसमें एक जून से पांच सितंबर तक के वर्षापात व धान की राेपनी के प्रतिशत का आकलन किया गया है, जहां 30 प्रतिशत से कम धान की राेपनी हुई, उन पंचायताें काे ही इस सूची में रखा गया है. आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव एम रामचंद्रुडु ने जारी पत्र में सभी डीएम, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला आपदा विभाग के अधिकारी समेत संबंधित अधिकारी काे निर्देश दिया है कि 31 अगस्त तक जहां खरीफ फसलाें की 70 प्रतिशत से कम राेपनी हुई है, उन पंचायताें के लाेगाें काे लाभ दिया जायेगा.
कैसे प्राप्त करें यह लाभ
चयनित पंचायताें में रहने वाले परिवार के मुखिया अपने पंचायत के जनप्रतिनिधि(मुखिया, पंचायत सचिव) से सूखा राहत फॉर्म लेकर उसके कॉलम काे भरें फिर उसके साथ आधार कार्ड व बैंक पासबुक की फाेटाे कॉपी संबंधित अधिकारी के पास जमा करेंगे. उनके जमा फॉर्म के आधार पर अॉनलाइन किया जायेगा. डाटा इंट्री के हिसाब से लाभुक के खाते में पीएफएमएस के माध्यम से तीन हजार रुपये चले जायेंगे.
हालांकि, इसके लिए अक्तूबर तक का इंतजार करना हाेगा, चूंकि 15 अक्तूबर काे तीन बिंदुआें, जिसमें खेती की गयी जमीन में दरार उत्पन्न हाेने, फसलाें में मुरझाने के प्रभाव या फिर उपज में 33 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी की समीक्षा की जायेगी. इसके बाद ही सूखा क्षतिपूर्ति की राहत राशि दी जायेगी.
केंद्रीय टीम ने उत्तरी कोइल नहर परियोजना का किया निरीक्षण
आमस : उत्तरी कोइल नहर परियोजना का शनिवार को केंद्रीय टीम ने निरीक्षण किया. केंद्रीय जल आयोग, वाइप कोष और जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारियों ने घंटों उक्त परियोजना का स्थल निरीक्षण किया.
दिल्ली से आये केंद्रीय जल आयोग के सीडब्ल्यू सी के मेंबर एस के हलदर ने प्रखंड क्षेत्र के मौलानाचक में बताया कि गया और औरंगाबाद के स्थानीय अभियंताओं के साथ मिल कर उत्तरी कोइल नहर की जांच की गयी. उन्होंने बताया कि उक्त नहर का पानी शुरू से अंतिम छोर तक पहुंच जाये, इसी को लेकर प्रयास किये जा रहे हैं.
मालूम हो कि आमस और गुरुआ आदि प्रखंडों के सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों को इससे लाभ होगा. इसके लिए स्थानीय किसान अनेकों बार आवाज उठा चुके हैं. उक्त टीम में सीडब्ल्यूसी के निदेशक विवेक पाल, उप निदेशक नीरज शर्मा और जल शक्ति मंत्रालय के सीनियर ज्वाइंट कमिशनर एमएस सलारे के अलावा करीब एक दर्जन अभियंता शामिल थे.
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