गया : आतंकवाद पर 15 मिनट 30 सेकेंड तो 22 बार किया चौकीदार शब्द का प्रयोग
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Apr 2019 6:55 AM
रोशन कुमार गया : नौ अगस्त 2015 के बाद मंगलवार को गया की ऐतिहासिक गांधी मैदान की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा को संबोधित किया. करीब 29 मिनट के संबोधन के शुरुआती 15 मिनट 30 सेकेंड तक प्रधानमंत्री ने जनसभा को आतंकवाद के मुद्दों से बांधे रखा. पीएम ने सात जुलाई 2013 […]
रोशन कुमार
गया : नौ अगस्त 2015 के बाद मंगलवार को गया की ऐतिहासिक गांधी मैदान की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा को संबोधित किया. करीब 29 मिनट के संबोधन के शुरुआती 15 मिनट 30 सेकेंड तक प्रधानमंत्री ने जनसभा को आतंकवाद के मुद्दों से बांधे रखा.
पीएम ने सात जुलाई 2013 को बोधगया के महाबोधि मंदिर सहित अन्य बौद्ध मठों में हुए सीरियल ब्लास्ट की याद ताजा करायी. आतंकवाद पर पीएम ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया और कांग्रेस की उपज हिंदू आतंकवाद की भी बात को दोहराया.
पीएम ने कहा कि अगर समझौता एक्सप्रेस की घटना में पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा कर जांच हुई होती तो आज उसके फैसले कुछ अलग होते. करीब 930 सेकेंड तक आतंकवाद पर तालियां बटोरने के बाद पीएम मोदी ने अपने चर्चित स्लोगन मैं भी हूं चौकीदार पर बोलना शुरू किया. पूरे भाषण में पीएम मोदी ने 22 बार चौकीदार शब्द का प्रयोग किया और चौकीदार के जरिये कांग्रेस द्वारा सार्वजनिक रूप से दी जानेवाली गाली की चर्चा की.
सुनायी उत्तर कोयल परियोजना की कहानी: गांधी मैदान में आयोजित चुनावी सभा गया व औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्रों के लिए थी. दोनों लोकसभा क्षेत्र से कार्यकर्ता शामिल हुए थे. ऐसे में इस चुनावी सभा को गया व औरंगाबाद से जोड़ने के लिए पीएम मोदी ने उत्तर कोयल परियोजना की कहानी भी जगजाहिर की.
उन्होंने कहा कि 1972 में शुरू हुई उत्तर कोयल परियोजना पर कांग्रेस की सरकार 47 वर्षों तक सोती रही और गया व औरंगाबाद के किसान रोते रहे. लेकिन, 2014 में एनडीए की सरकार बनी तो उत्तर कोयल परियोजना से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर कराया और परियोजना को फिर से शुरू किया गया. पीएम मोदी ने कहा कि जिस परियोजना को 30 करोड़ में ही पूरा हो जाना चाहिए था, उस परियोजना को अब पूरा करने में 2500 करोड़ रुपये लग रहे हैं. पीएम मोदी ने मांझी वोट बैंक पर निशाना साधते हुए पर्वत पुरुष दशरथ मांझी को दो बार याद किया.
मांझी के साथ-साथ बाबा भीम राव आंबेडकर का भी नाम लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अगर नीतीश कुमार ने सामाजिक न्याय के साथ विकास की धारा नहीं बहायी होती, तो न जाने बिहार में कितने दशरथ मांझी को पहाड़ तोड़ना पड़ता.
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